शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

गंगा जमुनी तहजीब की जनक कांग्रेस क्यो नही

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1997 में गुलशन कुमार की हत्या हुई और हमने सोचा फ़िल्म जगत में झगड़ा बहुत बढ़ गया है।
और फ़िल्मों से आरती व देवी के गाने विलुप्त हो गए, गानो से राम व कृष्ण शब्द मिट गए, हिंदी गाने उर्दू/अरबी गाने बन गए, अल्लाह व खुदा हर लाइन में आ गए गाने की।
और हमने 1997 में सोचा था कि फ़िल्म जगत में झगड़ा बहुत बढ़ गया है।
Sun Tzu कह गए है कि सबसे बड़ी जीत वह होती है जो बिना लड़े मिल जाय।
वे लड़ भी रहे है और जीत भी रहे है और हम सोच रहे है कि फ़िल्म जगत में झगड़ा बहुत बढ़ गया, डॉक्टर नारंग road rage में मारे गए, अंकित सक्षेना की हत्या प्रेम प्रसंग में हो गयी।
उनकी असली ताक़त ही है कि उनका शिकार कभी जान ही नही पाता कि लड़ाई चल भी रही है।
हम सोच रहे है कि बुआ बबुआ में गठबंधन हो गया और जबकि व्यवस्था केवल ये हुई है कि उनका वोट न बँटे। दुनिया भर में काफ़िर जिहाद को सामान्य अपराध मानता है और एक दिन निगल लिया जाता है।
बचपन में कहानियो में सुनते थे कि राजा एक दूसरे की हत्या के लिए विष कन्या भेजते थे। राजा आकर्षण में फँसता व विष कन्या अपना काम कर देती।
दुनिया की सबसे बड़ी विषकन्या तो शांतिमजहब है। काफ़िर सम्मोहन में फँसते है व गर्दन गँवा देते है, और पड़ोसी काफ़िर कहता है कि शहर में अपराध बहुत बढ़ गया है।
गुलशन कुमार को बडी कुरता और निर्दयता से मरवाया  था दाऊद इब्राहिम ने......  गोलियों से छलनी,  बेदम, खून से लथपथ गुलशन कुमार जब एक ह्यूम पाईप के पीछे छुप गये,  तो फोन पर पाकिस्तान में बैठ कर हर लम्हे की  monitoring  करता हुआ दाऊद इब्राहिम ने आदेश दिया अपनी हिट टीम को कि उसको वहाँ से घसीट के बाहर निकाल के धीरे - धीरे तडपा के मारे, और उसकी चीखो की आवाज उसके फोन पर  live  सुनाई जाए......
और ऐसा ही किया गया....  उसकी हिट टीम द्वारा.....
अगर मारना ही था,  तो  normal  तरीके से भी मारा जा सकता था गुलशन कुमार को......  इतने वहशी तरीके से मारने की क्या जरूरत थी  ???
"भोले  बाबा के भक्त की कोई मदद नहीं की भोले  बाबा ने.......  हिन्दुऔ का भगवान बहुत कमजोर है अल्लाह से..... "    ... गुलशन कुमार को सिर्फ मारना ही नहीं था, एक मेसेज कनभे करना था पूरी की पूरी हिन्दु जनता को......
उस नृशंस हत्या ने एक तीर से कई शिकार किए माफिया गैन्ग  के लिए.......  हिन्दु धर्म की बातें गायब हो गई फिल्मो से......  माफिया को चन्दा मिलना सुनिश्चित हो गया बॉलीवुड की हर छोटी बडी हस्ती से......  माफिया कलाकार की चाँदी हो गई फिल्मो के हर क्षेत्र में.......  और फिल्मी /बिजनेस क्षेत्र के विवादो के निपटारे के लिए लोग कोर्ट के बदले कराची जाने लगे.....
लेकिन भारत का हिन्दु तब भी धिम्मी  idiot  था, और आज भी धिम्मी  idiot
उतना तो नहीं है जितना पहले था.......
लेकिन उतना जागरुक भी नहीं है जितना होना चाहिये

साभार
श्री रुद्र अनीश

मोदी क्यो कारण अनेक है

मुझे मोदी सरकार में सबसे अच्छी बात लगी कि यह सिस्टम को बदल रही है, वह पुराना superfecial चेंज वाला तरीक़ा नहीं है। एक उदाहरण लेते हैं हेल्थ care  सिस्टम।
देखते हैं स्टेप बाई स्टेप कैसे कार्य हुआ।
१) सबसे पहले तो लोगों को प्रेरित किया गया कि वह जेनरल फ़िटनेस रखें। स्वयं प्रधान मंत्री मोदी से लेकर सारे मंत्रियों ने फ़िटनेस पर ज़ोर दिया
२) फिर स्वच्छता पर ज़ोर दिया गया। ज़ाहिर सी बात है पचास प्रतिशत बीमारियाँ गंदगी से फैलती हैं। स्वच्छ भारत अभियान आदि सब इसी healthcare क्रांति का अंग हैं
३) भारतीय योग पद्धति से व्यायाम और योग / आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा दिया गया। भारतीय परिवेश में बीमारी को जड़ से समाप्त करने का सबसे कारगर तरीक़ा आयुर्वेद ही है। देश में सबसे उपेक्षित आयुर्वेद/ योग रहा अब तक।

इन तीन तरीक़ों से देश की सवा अरब जनसंख्या कहीं ना कहीं मोदी सरकार की हेल्थ care क्रांति के दायरे में आ गई।
४) अब जब बेसिक  होम्वर्क ठीक हो गया तो आगे बढ़ते हुवे कम्पनियों पर लगाम लगाई गई जो अनाप सनाप फ़ायदा कमा रही थीं। इसी कड़ी में लाखों के मिलने वाले स्टेंट आदि की क़ीमत हज़ारों में आ गई।
५) जनता को सस्ती क़ीमत पर दवाई मुहैय्या कराने हेतु प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए। इन केंद्रों में जेनेरिक दवाइयाँ वाजिब दाम पर मिलती हैं। मैंने स्वयं ख़रीदी हैं, जितने में पहले पाँच दिन की दावा होती थी, यहाँ एक महीने की मिल जाती है।

इन दो क़दमों से मरीज़ों की औषधि के बिल में राहत आई। अब अगला क़दम देश की जनता को इलाज उपलब्ध कराना
६) आयुशमान भारत योजना ने देश का परिवेश ही बदल दिया। हर सामान्य व्यक्ति को साल में पाँच लाख तक का इलाज मुहैय्या कराना एक बड़ा अचीवमेंट रहा
७) आयुशमान भारत योजना ने देश के हज़ारों उद्यमियों को प्रेरित किया कि वह पैसा ख़र्च कर अस्पताल खोलें, ग़रीब मरीज़ का इलाज करें, सरकार पैसा देगी। उद्योग लगाने में लोगों को बसिक समस्या यही  होती है लोग कैसे  आएँगे। आयुशमान भारत पैनल में एनरोल हो जाने से अस्पतालों को एक तरह की गारंटी हो गई कि पेशेंट आ जाएँ पैसा सरकार से मिल जाएगा।
इन दो क़दमों से देश में हज़ारों छोटे छोटे अस्पताल शक्रिय हो गए। करोड़ों लोगों को ईलाज की सुविधा उपलब्ध हुई। (स्पष्ट कर दूँ आयुशमान भारत योजना में बड़े अस्पताल भी हैं)
अब जब लोग फ़िट रहने लगे, दवाई ठीक दाम पर मिलने लगी, ग़रीबों का इलाज होने लगा, प्राइवट अस्पताल खुल गए, अब आते हैं अगले क़दम पर।
८) पूरे देश में दसियों AIIMS बनने आरम्भ हुवे। युद्ध स्तर पर काम चलते हुवे बहुत सारे  बस दो तीन साल में मरीज़ों को इलाज मुहैय्या कराने लगे
९) भारत में भ्रस्ताचार का पर्याय बन चुकी मेडिकल काउन्सिल ओफ़ इंडिया को भंग कर दिया गया और कमान अपने हाथ में ले ली गयी।
१०) MCI ठीक कर सरकार अगले मिशन पर है, हर जिले में एक बड़ा अस्पताल और हर जिले में एक मेडिकल कोलेज बनाने के लिए। इसके अतिरिक्त देश भार में २०२२ तक पंद्रह लाख वेलनेस सेंटर खोले जाने का प्लान है।

इन दस क़दमों से दस वर्षों में भारत की जीर्ण शीर्ण हो चुकी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से रेपेर कर दी गई।

बाक़ी फिर जो अंध विरोधी हैं, उन्हें यह नहीं समझाया जा सकता, हाँ भारत के हर सामान्य आम नागरिक तक अपनी स्कीम के लाभ पहुँचा पाना एक बिग डील है। मोदी सरकार को इस क्षेत्र में सौ/ सौ।
साभार
श्री नितिन त्रिपाठी

राहुल की 72 हजारी योजना देश को बर्बादी की तरफ ले जाएगी

5 करोड़ परिवार को 72000 रुपया सालाना देने का मतलब समझ रहे है आप ? भारत की अर्थव्यवस्था और सालाना बजट पर 3.6 लाख करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा. अगर कांग्रेस सरकार आती है तो 5 करोड़ परिवारों को सालाना 72 हजार रुपया कहां से दिया जाएगा ? इसकी क्या गारंटी है, कांग्रेस सरकार बनने के बाद 5 करोड़ परिवारों को 72 हजार रुपया सालाना दिया जाएगा ?
भारत में लगभग 26 करोड़ परिवार है, लगभग 130 करोड़ की जनसंख्या है, लगभग 7.6 करोड़ करदाता है.
2019-20 के लिए अनुमानित बजट 27.84 लाख करोड़ का है. जिसमे पेंशन, डिफेंस, सब्सिडी, कृषि, उद्योग जगत, नॉर्थ ईस्ट डेवलपमेंट, शिक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, ब्याज, ग्रामीण विकास, जन कल्याणकारी योजनाओं इत्यादि के लिए धनराशि का आवंटन किया गया है. वित्त वर्ष 2019-20 के लिए 3.4% राजकोषीय घाटे का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की एक रिपोर्ट के अनुसार 2016 में लगभग 12.5 करोड़ जनसंख्या अत्यंत गरीब थी, मोदी सरकार के प्रयासों से करोड़ों गरीबों के जीवन स्तर में सुधार हुआ और 2018 तक लगभग 5 करोड़ जनसंख्या ही अत्यंत गरीब की श्रेणी में बची है. मतलब 2 साल में मोदी सरकार ने लगभग 7.5 करोड़ लोगो के जीवन स्तर को बेहतर बनाया है. इसीलिए भारत आज दुनिया में सबसे तेज गति से गरीबी मिटाने वाला देश बन कर उभरा है.
ऊपर आपने भारत की अर्थव्यवस्था के बारे में संक्षेप में जान लिया है, अब जानिए कैसे 5 करोड़ गरीब परिवारों को सालाना 72 हजार रुपया दिया जाएगा ? (यदि कांग्रेस की सरकार आती है तो) यह मुफ्तखोरी देश का क्या हाल कर सकती है देखिए :
 50 करोड़ गरीबों को 5 लाख प्रति वर्ष स्वास्थ्य बीमा सुरक्षा देने वाली योजना आयुष्मान भारत बंद कर दी जाएगी। (राहुल गांधी ने कहा भी है कि उनकी सरकार बनेगी तो आयुष्मान भारत योजना बंद कर देंगे)
 होम लोन की ब्याज दर बढ़ा दी जाएगी।
 किसानों को कर्जमाफी नहीं दी जाएगी।
 विभिन्न पेंशन योजना बंद कर दी जाएंगी।
 रक्षा बजट कम कर दिया जाएगा।
 शिक्षा, स्वास्थ्य, विकास इत्यादि का बजट कम कर दिया जाएगा।
 महंगाई दर जो आज औसत 4% से भी कम है, वो औसत 10% के ऊपर पहुंच जाएगी।
 आयकर और जीएसटी बढ़ा दिया जाएगा।
 जिन वस्तुओं पर 0% टैक्स लगता है उन वस्तुओं पर 18% टैक्स लगाया जाएगा।
 जो एल ई डी बल्ब आज 60-80 रुपए में मिलता है वो फिर से 250 में मिलने लगेगा।
 बिजली महंगी, पानी महंगा, सब्जी महंगी, दैनिक जीवन की जरूरी वस्तुएं महंगी हो जाएंगी।
 रेल किराया, बस किराया, हवाई किराया सब बढ़ जाएगा।
 1 रुपया महीना और 90 पैसे डेली के प्रीमियम पर जो 2 लाख का दुर्घटना बीमा और जीवन बीमा मिल रहा है, ये भी बंद हो जाएगा।
 करदाताओं का खून चूसा जाएगा।
 विभिन्न विकास की परियोजनाओं को रोक दिया जाएगा, ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
 जन कल्याणकारी योजनाओं को एक एक करके बंद कर दिया जाएगा।
 72 हजार सालाना देने के नाम पर एक नया घोटाला होगा।
 रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर बहुत कमजोर होता चला जाएगा।
 भारत की स्थिति भी वेनेजुएला जैसी हो जाएगी जहां करोड़ों रुपए देकर एक पैकेट ब्रेड भी बड़ी मुश्किल से नसीब होता है।
कुल मिलाकर 80 करोड़ जनता का खून चूस कर, 25 करोड़ आबादी को खुश करने की योजना है, चूंकि यह योजना कांग्रेस की है, तो इसमें तुष्टिकरण और वोट बैंक निश्चित होगा, 90% विशेष समुदाय को खुश करने के लिए कांग्रेस देश को एक और झांसा दे रही है।
इसलिए कांग्रेस की इस मुफ्तखोरी और समुदाय विशेष का तुष्टिकरण करने वाली योजना के झांसे में मत आइए। सबका साथ सबका विकास का साथ दीजिए, एक बार फिर प्रचंड बहुमत से ईमानदार मोदी सरकार चुनिए।
#TrustNaMo #ModiMatters #NaMoAgain #NeverTrustOnCongress
✍️ Abhijeet Srivastava

शेर को सवाशेर चौकीदार

सेर को सवा-सेर चौकीदार Part-2 (सत्य घटना) : कल पार्ट-1 पढ़ने के बाद कई लोगों के मन मे संशय था कि FIR हुई कि नही, भैया कल की पोस्ट का सार था कि पुलिस प्रशासन का मुँह मत ताको, अपने पुरुषार्थ को जगाओ, खुद से अपनी मदद करो, उठो और लड़ो अपने हक के लिए, किसी के आगे भीख का कटोरा ले कर मत खड़े हो कि हमे न्याय दे दो, न्याय न मिले तो न्याय छीन कर लो, हम छीन कर लेंगे आज़ादी, क्या समझे, कब तक अंगूठा चूसते रहेंगे? कब तक बैसाखियों पर चलते रहेंगे? उंगली पकड़ कर चलना छोड़ दीजिए अब आपकी उम्र 70 वर्ष हो चुकी है ।
FIR करवाने का कोई मूड न था बस लड़को को सबक सिखाना था, पुलिस ने लड़को के घर दबिश दी, लड़के गायब कर दिए गए, हमने भी ज़्यादा दिमाग नही लगाया, फिर शुरू हुआ नेतागिरी का दौर, सिफारिशों के दौर, मैंने किसी की नही सुनी, क्योकि मैं उस इलाके में किसी नेता को पैदा ही नही होने देना चाहता था, क्योकि ऐसे नेता ही पहले इन बच्चों को छुड़वाते हैं फिर वे खुद इन से गलत काम करवाते हैं, इन्हें जेहादी बनवाते हैं, मैं यहाँ मौलाना मसूद अजहर या हाफ़िज़ सईद नही बनने दूँगा ये मैंने ठान लिया था, बड़े बड़े मुस्लिम नेताओं के फ़ोन आये मैंने सिरे से नकार दिया ।
इसके बाद एक फ़ोन आया अपने आपको खांग्रेस का अध्यक्ष बता रहे थे मौलाना साहब, मुझ से बोले "आप मुझे जानते नही है" मैंने जवाब दिया "मुझे आपको जानने की ज़रूरत ही नही है" दुनिया भर की बातें करने के बाद बोले "मैं सबको जनता हूँ, आपको फलाने फलाने से फ़ोन करवा दूँगा" बस ये वो समय था जब मेरा पारा चढ़ गया, एक तो नेता ऊपर से मुझे धौंस? इतनी हिम्मत? मैंने 2 टूक कहा "अरे आप सिंधिया से भी फ़ोन करवा देंगे ना तो मैं उनको भी बोल दूँगा बीच मे बोलने वाले आप कौन?, मैं किसी की नही सुनूँगा आज़मा कर देख लीजिए" साहब ने घबरा कर तुरंत गीयर बदला और बोले सर आपका छोटा भाई हूँ निवेदन कर रहा हूँ और फ़ोन काट दिया, मैंने तुरंत इंस्पेक्टर साहब को फ़ोन घुमाया और पूछा "क्या हुआ भाई? वो लड़के मिले की नही" कल तक मैं खुद कह रहा था बच्चे हैं भविष्य खराब हो जाएगा, आज अचानक मेरे बदले सुर भांप कर उन्होंने पुलिस की गाड़ी भेज लड़कों को 10 मिनट के अंदर लॉकअप में डाल दिया, और करो नेतागिरी, अच्छे भले छोड़ रहा था, गुस्सा थोड़ा शांत हुआ तो सोचा रात तक छुड़वा दूँगा ।
पर ये क्या कुछ ही समय बाद मुझे मेरे पड़ोसियों से फ़ोन आने शुरू हो गए "सर आपके घर के बाहर 10-12 मुश्तण्डे खड़े हैं, आपको पूछ रहे हैं" पता चला मौलाना साहब अपने गुंडों के साथ मेरे घर के बाहर खड़े हैं, लगता हैं उन्हें किसी ने मेरे बारे में बताया नही था, CCTV में पूरी फुटेज आ गयी, मौलाना साहब मुझ से फ़ोन पर good faith में बात कर रहे थे, अपने आपको मेरा छोटा भाई बता रहे थे, बाद में पता चला वे मेरा कॉल रिकॉर्ड कर रहे थे, मने छोटा भाई बन कर पीठ में छुरा घोंपा जा रहा था, अगर कोई मुझे से पूछे कि दुनियां में आपको सबसे ज़्यादा नफरत किस चीज़ से है तो मेरा जवाब होगा विश्वासघात, अब मेरे दिल से खून बह रहा था और दिमाग मे खून उबल रहा था, मैंने तुरंत FIR करने का निर्णय लिया और इंस्पेक्टर को कहा "FIR करनी है इनके खिलाफ" मेरी बात सुन कर वो अचंभित हुए पर पूरे विश्वास के साथ जवाब आया "जब आप चाहें सर", मेरे पास कई लोगों के फ़ोन आये किसी की एक न सुनी, कई BJP के नेताओं की भी सिफारिश आयी (वे सब आज के बाद टिकट भूल जाएं) उन्हें हराने के लिये अलग से बजट रख दिया है ।
मैंने तुरंत थाने जाने का निर्णय लिया, पर कल का दिन ही खराब था मेरे मित्र के साथ एक पंगा हो गया, उसे सुलझाने के चक्कर मे 3 घण्टे निकल गए, फिर थाने आया तो गुस्सा थोड़ा शांत हुआ, इंस्पेक्टर साहब बोले "सर साईकल छीनी थी इस पर लूट और डकैती का मुकदमा बनता है, आप कहें तो धारा लगा दूँ? 6 महीने तक ज़मानत नही होगी" फिर खुद ही पसीज कर बोले "ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी इन सबकी" जो लड़के कल दादागिरी से बात कर रहे थे आज लॉकअप में बंद गिड़गिड़ा रहे थे, उनके घरवाले हाँथ पाँव जोड़ रहे थे, दुविधा ये थी कि अगर मैं इन लड़को को छुड़वा देता तो कई नेता इसका श्रेय लेने आ जाते, कई नेता उस इलाके में पैदा हो जाते, कई मसूद अजहर और हाफ़िज़ सईद के पैदा होने का खतरा था, सो FIR करवाना मजबूरी हो गयी थी, मैंने इंस्पेक्टर साहब से कहा कोई छोटी मोटी धारा लगा दीजिये इन्हें सबक भी मिल जाये और ज़िन्दगी भी खराब न हो, उन्होंने कहा "सर कम से कम चोरी की तो लगानी ही पड़ेगी" भारी मन से उन्होंने और मैंने FIR करवा दी ।
ये सब सिर्फ उस एक समझदार मौलाना जी तथाकथित खांग्रेस अध्यक्ष के चक्कर मे हुआ, ना वो मुझे धमकते, ना फ़ोन रिकॉर्ड करते, और न मेरे घर हमला करते, तो कुछ नही होता, थाने में तकरीबन 100 लोगों का हुजूम था, ये मूर्ख अब भी नही समझ पा रहे थे कि 100 क्या मुझे करोड़ से भी फर्क नही पड़ने वाला, संख्या बल मेरे लिए मायने ही नही रखता, हम 2 लोगों में भी बैठक कर लेते हैं और 5000 के सेमिनार को भी मना कर देते हैं अगर राष्ट्रहित में न हो तो, बेरहाल उन में से एक लड़के के घरवाले पहचान गए कि अगर सिफारिश लगवानी है तो कहाँ से लगवानी है, एक राष्ट्रभक्त मित्र आये उन्होंने कहा भाईसाहब फलां लड़के का कुछ हो सकता है क्या? मैंने बिना सवाल जवाब किये इंस्पेक्टर साहब को आवाज़ दी भैया फलां लड़के को बाहर कर दीजिए, लड़का बाहर, सब कुछ इतनी आसानी से देख सब भौचक्के रह गए, सब मेरे पास आये शुक्रिया अदा करने, मैंने कहा मुझे नही इन्हें शुक्रिया कीजिये इनकी वजग से आपका बच्चा छूटा है, लोग उन्हें शुक्रिया अदा करने लगे, मैंने उस इलाके में एक राष्ट्रभक्त को उनका पैरोकार बना कर खड़ा कर दिया, सबको समझ आ गया कि काम अगर कोई करवा सकता है तो राष्ट्रभक्त ही करवा सकते हैं, बाकी किसी के बस की बात नही, सिफारिश लगवानी है तो राष्ट्रभक्तों से लगवाईये आपके समाज मे भी कई राष्ट्रभक्त हैं, उनके संपर्क में रहिये, वे ही आपको मुश्किल स्थिति से बाहर निकाल सकते हैं, उनकी सब सुनते हैं मैं भी, क्योकि उनकी रेप्यूटेशन उनकी इज़्ज़त है ।
जो मुस्लिम मित्र मुझे मुसलमानों का दुश्मन करार देते हैं वो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें, इस दुश्मन ने कल एक मुसलमान बच्चे को रिहा करवा दिया, बाकियों पर जिन पर लूट और डकैती की धारा लगनी थी उसके बजाए सामन्य चोरी की धारा लगवाई, वो भी किसी मौलाना के कहने पर नही बल्कि एक राष्ट्रभक्त के कहने पर, ये मौलानाओं का चक्कर छोड़िये साहब ये बात बनाने की जगह बिगाड़ देते हैं, आदमी को जबरदस्ती FIR करने पर मजबूर कर देते हैं, राष्ट्रभक्त बनिये और राष्ट्रभक्तों से जुड़िये, नेशन फर्स्ट अपने दिल मे रखिये ये नितिन शुक्ला आपके लिए अपनी जान भी देगा, और अगर कोई मौलाना मसूद अज़हर, मौलाना हाफ़िज़ सईद या बिन लादेन बनने की कोशिश करेगा तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा, मैं इस देश में ऐसे किसी मौलाना को पनपने नही दूँगा, यहाँ Shiraz Quraishi भाई जैसे को सर माथे बैठाया जाएगा और ज़ाकिर नाईक जैसों को जूती की नोक पर रखा जाएगा, हर वो व्यक्ति जो देश की बात करेगा उसका इस्तकबाल होगा, ये देश हम सबका है, इसे सुरक्षित रखना हम सबका दायित्व है, अब आपको चुनना है कलाम बनना है या कसाब ।
और हां वो रिकॉर्डिंग वाले मौलाना जी पर आज घर मे घुस कर मेरे बीवी बच्चे को धमकाने, उन्हें जान से मारने की धमकी देने, उन पर हलमा करने, उन्हें अगवा करने के प्रयास करने और उन्हें जान से मारने का प्रयास करने का मुकदमा दायर करूँगा, पिक्चर अभी बाकी है दोस्त ।

साभार
श्री नितिन शुक्ला

जिहाद का इलाज

*वर्तमान सन्दर्भ में इतिहास का एक  गौरवशाली अध्याय*
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*जिहाद का इलाज*
*सन 711ई. की बात है। अरब के पहले मुस्लिम आक्रमणकारी मुहम्मद बिन कासिम के आतंकवादियों ने मुल्तान विजय के बाद  एक विशेष सम्प्रदाय हिन्दू के ऊपर गांवो शहरों में भीषण रक्तपात मचाया था। हजारों स्त्रियों की छातियाँ नोच डाली गयीं, इस कारण अपनी लाज बचाने के लिए हजारों सनातनी किशोरियां अपनी इज्जत की रक्षा के लिए कुंए तालाब में डूब मरीं।लगभग सभी युवाओं को या तो मार डाला गया या गुलाम बना लिया गया। भारतीय सैनिकों ने ऎसी बर्बरता पहली बार देखी थी।*
एक बालक तक्षक के पिता कासिम की सेना के साथ हुए युद्ध में वीरगति को प्राप्त हो चुके थे। लुटेरी अरब सेना जब तक्षक के गांव में पहुची तो हाहाकार मच गया। स्त्रियों को घरों से खींच खींच कर उनकी देह लूटी जाने लगी।भय से आक्रांत तक्षक के घर में भी सब चिल्ला उठे। तक्षक और उसकी दो बहनें भय से कांप उठी थीं।
तक्षक की माँ पूरी परिस्थिति समझ चुकी थी, उसने कुछ देर तक अपने बच्चों को देखा और जैसे एक निर्णय पर पहुच गयी। माँ ने अपने तीनों बच्चों को खींच कर छाती में चिपका लिया और रो पड़ी। फिर देखते देखते उस क्षत्राणी ने म्यान से तलवार खीचा और अपनी दोनों बेटियों का सर काट डाला।उसके बाद अरबों द्वारा उनकी काटी जा रही गाय की तरफ और  बेटे की ओर अंतिम दृष्टि डाली, और तलवार को अपनी छाती में उतार लिया।
आठ वर्ष का बालक तक्षक एकाएक समय को पढ़ना सीख गया था, उसने भूमि पर पड़ी मृत माँ के आँचल से अंतिम बार अपनी आँखे पोंछी, और घर के पिछले द्वार से निकल कर खेतों से होकर जंगल में भाग गया।
                                25 वर्ष बीत गए। अब वह बालक बत्तीस वर्ष का पुरुष हो कर कन्नौज के प्रतापी शासक नागभट्ट द्वितीय का मुख्य अंगरक्षक था। वर्षों से किसी ने उसके चेहरे पर भावना का कोई चिन्ह नही देखा था। वह न कभी खुश होता था न कभी दुखी। उसकी आँखे सदैव प्रतिशोध की वजह से अंगारे की तरह लाल रहती थीं। उसके पराक्रम के किस्से पूरी सेना में सुने सुनाये जाते थे। अपनी तलवार के एक वार से हाथी को मार डालने वाला तक्षक सैनिकों के लिए आदर्श था। कन्नौज नरेश नागभट्ट अपने अतुल्य पराक्रम से अरबों के सफल प्रतिरोध के लिए ख्यात थे। सिंध पर शासन कर रहे अरब कई बार कन्नौज पर आक्रमण कर चुके थे,पर हर बार योद्धा राजपूत उन्हें खदेड़ देते। युद्ध के सनातन नियमों का पालन करते नागभट्ट कभी उनका पीछा नहीं करते, जिसके कारण मुस्लिम शासक आदत से मजबूर बार बार मजबूत हो कर पुनः आक्रमण करते थे। ऐसा पंद्रह वर्षों से हो रहा था।
इस बार फिर से सभा बैठी थी, अरब के खलीफा से सहयोग ले कर सिंध की विशाल सेना कन्नौज पर आक्रमण के लिए प्रस्थान कर चुकी है और संभवत: दो से तीन दिन के अंदर यह सेना कन्नौज की सीमा पर होगी। इसी सम्बंध में रणनीति बनाने के लिए महाराज नागभट्ट ने यह सभा बैठाई थी। सारे सेनाध्यक्ष अपनी अपनी राय दे रहे थे...तभी अंगरक्षक तक्षक उठ खड़ा हुआ और बोला---
*महाराज, हमे इस बार दुश्मन को उसी की शैली में उत्तर देना होगा।*
महाराज ने ध्यान से देखा अपने इस अंगरक्षक की ओर, बोले- "अपनी बात खुल कर कहो तक्षक, हम कुछ समझ नही पा रहे।"
*"महाराज, अरब सैनिक महाबर्बर हैं, उनके साथ सनातन नियमों के अनुरूप युद्ध कर के हम अपनी प्रजा के साथ घात ही करेंगे। उनको उन्ही की शैली में हराना होगा।"*
महाराज के माथे पर लकीरें उभर आयीं, बोले-
"किन्तु हम धर्म और मर्यादा नही छोड़ सकते सैनिक। "
तक्षक ने कहा-
*"मर्यादा का निर्वाह उसके साथ किया जाता है जो मर्यादा का अर्थ समझते हों। ये बर्बर धर्मोन्मत्त राक्षस हैं महाराज। इनके लिए हत्या और बलात्कार ही धर्म है।"*
"पर यह हमारा धर्म नही हैं बीर"
"राजा का केवल एक ही धर्म होता है महाराज, और वह है प्रजा की रक्षा। देवल और मुल्तान का युद्ध याद करें महाराज, जब कासिम की सेना ने दाहिर को पराजित करने के पश्चात प्रजा पर कितना अत्याचार किया था। ईश्वर न करे, यदि हम पराजित हुए तो बर्बर अत्याचारी अरब हमारी स्त्रियों, बच्चों और निरीह प्रजा के साथ कैसा व्यवहार करेंगे, यह आप भली भाँति जानते हैं।"
महाराज ने एक बार पूरी सभा की ओर निहारा, सबका मौन तक्षक के तर्कों से सहमत दिख रहा था। महाराज अपने मुख्य सेनापतियों मंत्रियों और तक्षक के साथ गुप्त सभाकक्ष की ओर बढ़ गए।
अगले दिवस की संध्या तक कन्नौज की पश्चिम सीमा पर दोनों सेनाओं का पड़ाव हो चूका था, और आशा थी कि अगला प्रभात एक भीषण युद्ध का साक्षी होगा।
आधी रात्रि बीत चुकी थी। अरब सेना अपने शिविर में निश्चिन्त सो रही थी। अचानक तक्षक के संचालन में कन्नौज की एक चौथाई सेना अरब शिविर पर टूट पड़ी। अरबों को किसी हिन्दू शासक से रात्रि युद्ध की आशा न थी। वे उठते,सावधान होते और हथियार सँभालते इसके पुर्व ही आधे अरब गाजर मूली की तरह काट डाले गए।
इस भयावह निशा में तक्षक का शौर्य अपनी पराकाष्ठा पर था।वह घोडा दौड़ाते जिधर निकल पड़ता उधर की भूमि शवों से पट जाती थी। आज माँ और बहनों की आत्मा को ठंडक देने का समय था....
उषा की प्रथम किरण से पुर्व अरबों की दो तिहाई सेना मारी जा चुकी थी। सुबह होते ही बची सेना पीछे भागी, किन्तु आश्चर्य! महाराज नागभट्ट अपनी शेष सेना के साथ उधर तैयार खड़े थे। दोपहर होते होते समूची अरब सेना काट डाली गयी। अपनी बर्बरता के बल पर विश्वविजय का स्वप्न देखने वाले आतंकियों को पहली बार किसी ने ऐसा उत्तर दिया था।
विजय के बाद महाराज ने अपने सभी सेनानायकों की ओर देखा, उनमे तक्षक का कहीं पता नही था।सैनिकों ने युद्धभूमि में तक्षक की खोज प्रारंभ की तो देखा-लगभग हजार अरब सैनिकों के शव के बीच तक्षक की मृत देह दमक रही थी। उसे शीघ्र उठा कर महाराज के पास लाया गया। कुछ क्षण तक इस अद्भुत योद्धा की ओर चुपचाप देखने के पश्चात महाराज नागभट्ट आगे बढ़े और तक्षक के चरणों में अपनी तलवार रख कर उसकी मृत देह को प्रणाम किया। युद्ध के पश्चात युद्धभूमि में पसरी नीरवता में भारत का वह महान सम्राट गरज उठा-
"आप आर्यावर्त की वीरता के शिखर थे तक्षक.... भारत ने अबतक मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्योछावर करना सीखा था, आप ने मातृभूमि के लिए प्राण लेना सिखा दिया। भारत युगों युगों तक आपका आभारी रहेगा।"
*इतिहास साक्षी है, इस युद्ध के बाद अगले तीन शताब्दियों तक अरबों कीें भारत की तरफ आँख उठा कर देखने की हिम्मत नही हुई।*
*तक्षक ने सिखाया कि मातृभूमि की रक्षा के लिए प्राण दिए ही नही, लिए भी जाते है, साथ ही ये भी सिखाया कि दुष्ट सिर्फ दुष्टता की ही भाषा जानता है, इसलिए उसके दुष्टतापूर्ण कुकृत्यों का प्रत्युत्तर उसे उसकी ही भाषा में देना चाहिए अन्यथा वो आपको कमजोर ही समझता रहेगा।*
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*विनम्र निवेदन*
यह पोस्ट किसी​​​​​​✌​​​✌​​​​​​​​​ की मोहताज नही है। भारत के इतिहास की यह गौरवशाली कथा उच्च कोटि की ही है
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साभार
श्रीमती स्तुति शर्मा