रविवार, 31 मार्च 2019

बेल्जियम और न्यूजीलैण्ड इस्लामिक राष्ट्र बनने की तैयारी में हैं

बेल्जियम में मुस्लिम समर्थित पार्टी के बहुमत पाते ही वहाँ इस्लामिक राज्य स्थापना की तैयारियाँ आरम्भ हो चुकी हैं, मुस्लिम कट्टरपंथी ताक़तें वहाँ हर हाल में 'शरिया' लाना चाहती हैं, विद्रोह अपने चरम पर है आपके पास मोबाइल-लैपटॉप है, नेट है, सर्च करें तमाम न्यूज़, वीडियो, चित्र दिख जाएंगे कितनी भयानक त्रासदी से गुज़र रहा है बेल्जियम इन दिनों, जो कभी भी किसी बुरी चीज़ के लिए चर्चा में नहीं रहा, शांत देश था अब क्या हालात हैं समझिए।
न्यूज़ीलैंड में क्राइस्ट चर्च में हुए हमले के बाद वहाँ की लिबरल जमात ने ऐसा स्यापा बगराया कि कथित प्रायश्चित के नाम पर वहाँ की वाकई गैंग की पत्रकारों ने हिज़ाब पहनकर न्यूज़ पढ़ना आरम्भ कर दिया, रेडियो पर नमाज़ और अज़ान सुनाई जाएगी ऐसा निर्णय वहाँ की सत्ताधीश पार्टी ने लिया है, ताक़ि वे एक मज़हब विशेष के लोगों को मारे जाने का प्रायश्चित कर सकें, यह प्रायश्चित उन्हें क्या दिन दिखायेगा यह समय बताएगा
हालाँकि इस कृत्य का वहाँ जमकर विरोध हो रहा है....शायद अब राष्ट्रवादी तबका और मुखर हो क्योंकि यह ग़लत है तुष्टिकरण है, एक्स्ट्रा तेल लगाना कहाँ तक जायज़ है? उन्हें उनकी शांति की क़ीमत वसूलना आती है उन्होंने आपको ब्लैकमेल किया और आप हो गए।
भारत में भी तो कांग्रेस ने सालों यही किया? मुसलमानों के कथित पैरोकारों की हर जायज़ नाजायज़ बात मानने की एवज में उनका समर्थन लेती रही, कुछ अघोषित बातें तो ऐसी होती हैं जिसमें यह स्पष्ट दिखाई पड़ने लगता है कि कांग्रेस के बड़े लीडर पाकिस्तान के प्रति नरम दिली इसलिए दिखाते हैं क्योंकि उन्हें मालूम है कि यहाँ के मज़हबियों में एक बड़े तबके का दिल 'जीवे जीवे पाकिस्तान' करता है।
यह बात देश की राष्ट्रभक्त जनता चुपचाप गुन रही थी दशकों से....उसनें कहा नहीं यह देश किसी भी सूरत में ब्लैकमेलिंग से नहीं चलेगा, तुम्हें यहाँ रहना है तो नियम, कानून और संविधान मानना ही होगा....नहीं तो सॉरी हर जगह से लतियाये जाओगे और जो तुम्हारी इन नाजायज़ हरक़तों को सहलायेगा उसे भी राष्ट्रभक्त नेस्तनाबूत कर देंगे...
पर सोचिएगा कि 2014 में यह हम और आप क्यों कर पाए? क्योंकि जनसंख्या बल अभी राष्ट्रभक्तों के पक्ष में है....अन्यथा आज जो बेल्जियम में हो रहा भारत भी उसका गवाह बनता बन ही रहा था 1947 तो वैसे भी झेलकर बैठे ही हैं....
बहरहाल 2019 में भी यही बात ध्यान रखना कि हमें रेडियो पर समाचार और मनोरंजन सुनना है ना कि मज़हबी ध्वनियाँ...
#NaMoAgain
साभार
स्तुति शर्मा