रविवार, 31 मार्च 2019

बेल्जियम स्लामिक राष्ट्र बनने के कगार पर है

#मोदी_को_2019_मे_लाने_का_एक_और_कारण
°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°
#बेल्जियम उत्तर पश्चिम यूरोप में एक देश है जो सेकुलर होने के साथ साथ सभी धर्मों को अत्यधिक मान्यता देता है।
द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद आर्थिक उत्थान और नवनिर्माण के लिये श्रमिको की कमी के कारण सभी सीमाएं खोल दी गई। इसलिए जर्मनी, फ्रांस, नीदरलैंड इत्यादि ने यूरोप के नजदीकी मुस्लिम देशों से श्रमिक बुलाना शुरू किया। बेल्जियम ने पहले मोरक्को और तुर्की से और बाद में अल्जीरिया व ट्यूनीसिया से भी 1974 तक प्रवासी श्रमिक बुलाए। समय के साथ उन्हें अपने परिवार भी बेल्जियम लाने की छूट दे दी गई।
1960 से आस पास के मुस्लिम देशों से मुस्लिमों का आना शुरू हो गया। सरकार ने समरसता बनाते हुए 1974 में इस्लाम को एक धर्म की मान्यता भी दे दी। जिसको देश की सभी सुविधाएं और समानता का अधिकार दिया जाने लगा। आज बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स में 350 से अधिक मस्जिदें हैं। यह ना भूलें की यह एक श्रमिक की भांति देश में लाये गए थे।
बेल्जियम स्कूलों में मुस्लिम छात्र सरकारी खर्चे पर अपने धर्म की #कुरान की शिक्षा ले सकते है।
मुस्लिम जैसा सभी देशों में करते है अपनी जनसंख्या को शून्य से पांच दशक में 10% तक बढ़ा ली। राजधानी ब्रसेल्स में 35% तक आ चुकी हैं।
चूस्लिम हो और आतंक ना हो यह असंभव है। जर्मन में हेब्दो चार्ली के आतंकी इसी स्थान से थे। बेल्जियम अब आतंक का अड्डा बन गया है।
बेल्जियम को शरीयत से चलाने की कोशिशों ने जोर पकड़ लिया है। यहाँ हर एक को 12 वर्ष तक पढ़ाई और वोट देने का कानून है। अभी चुनाव में मात्र दो काउंसलर है पर होने बाले चुनाव में इस्लामिक पार्टी ने एलान किया है कि यदि उसकी पार्टी जीतती है तो #देश_में_शरिया  लागू कर दिया जाएगा।
बेल्जियम के इस्लामवादियों के बीच मोरक्कन मूल का 33 वर्षीय फ़ऊद बेल्कासेम भी ऐसा ही एक हीरो है।  बेल्जियम में शरियत लागू करवाने के लिए उसने 'शरिया 4 बेल्जियम' नामक एक आन्दोलनकारी गिरोह बनाया है। यह आईएस के लिए जिहादी भर्ती करता है। उसके 70 जिहादी आईएस की ज़मीन पर लड़ रहे बताए जाते हैं। बेल्कासेम ने अमेरिकी टेलीविज़न चैनल 'सीबीएन न्यूज़' की एक रिपोर्ट में कहा, 'हमारा विश्वास है कि सारी दुनिया पर शरियत का ही राज होगा।
#भारत_से_समानता -- भारत भी बेल्जियम की भांति सेकुलर देश है। देश के कई राजनीतक दल मुस्लिम की सभी मान्यताओं को सही ठहराते हुए तुष्टिकरण कर रहे है। रोहिंग्या हो या बंगलादेशी सभी को मानवता आधार पर देश में रखने की पैरवी करते है।
सोचे कि बेल्जियम में तो यह श्रमिक बन के गए थे, हमारे यंहा तो आज भी अपने आप को शासक और हिंदुओं को गुलाम मानते रहे है।
राजनीतक दल में केवल बीजपी और समर्थक राजनीतिक दल रोहिंग्या और बंगलादेशी को बापस भेजना चाहते है।
क्या आज के राजनीतिक दल असलियत जानते नही है कि यह सांप को दूध पिला रहे है?? अवश्य जानते है पर आज सत्ता के लालच में किसी की निकृष्टता तक जा सकते है।
अब हिन्दुओ/ सनातन को सोचना है कि क्या सनातनी देश को इस्लामिक देश बनने की ओर जाने देना चाहते है?
साभार
नीलेश पांडे

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें