बुधवार, 27 मार्च 2019

वो दिन और ये दिन | दिन दिन की बात

#जैश_ए_अल_ज़बाँ (कायरों की फौज)
जब अज़हर मसूद (जैश ए मोहम्मद वाला) को भारतीय एजेंसियों ने गिरफ्तार किया था तो उसकी अकड़ बिल्कुल उन लौंडों वाली थी जो पुलिस द्वारा बाइक रोकने पर तड़ी पेलते हैं "जानता है मेरा बाप कौन है" .... वहां मौजूद भारतीय सेना के एक मेज़र ने मसूद के कान के नीचे एक झापड़ धर दिया.... मेज़र का झापड़ जोरदार था बताते है मसूद ने अपनी सलवार में मूत दिया था एक ही थप्पड़ में.... और उसके बाद फिर मसूद को उंगली लगाने की जरूरत नहीं पड़ी भारतीय सेना के हर सवाल का जवाब वो तोते की तरह तुरंत दे देता था.....
कथित जेहादी हीरो ओसामा बिन लादेन को जब अमेरिकन आर्मी ने ठोंका था वो डर के मारे हथियार छोड़ अपनी बीवी के पीछे छिप कर कांप रहा था.....!
सद्दाम हुसैन को छह बाय छह की भूमिगत कोठरी में जब पकड़ा गया वो चुप चाप हाथ ऊपर कर जान की भीख मांग गिड़गिड़ा रहा था मुझे गोली मत मारना में सद्दाम हूँ....!
जब गद्दाफी को कुत्ते की तरह दौड़ा कर मारा गया वो गटर के पाइप में जा छिपा था बचने के लिए.....!
बगदादी, मुल्ला उमर..... चूहों की तरह छिपे हुए गुमनाम मौत मरे....
हाफ़िज़ मियां अपनी सुरक्षा के लिए लंबी चौड़ी फौज पालकर भी एक रात भी कहीं स्थाई डेरा नहीं जमाते...... तालिबान के कमांडर हों या ISIS के लड़ाके इनकी बुर्का पहन लिपिस्टिक लगा बचकर भागने की तस्वीरें आप सब ने जरूर देखीं होंगी......... #ये_इकलौती_सच्चाई है इन कथित गाजियों, जेहादी सरगनाओं की.... ये डरपोक, पिलपिले, नामर्द लोग होते हैं जो सिर्फ हथियारों की दम पर आम लोगों को आतंकित कर उनका शोषण करते हैं....
इन आसमानी किताब के खाद पानी से उपजे खरपतवारों ने सबसे ज्यादा नुक़सान खुद की कौम का ही किया है...... अपने साथी सरगनाओं की कम उम्र बच्चियों से निक़ाह कर उनका बलात्कार करना हो या इनके जाहिलाना ज्ञान में बह मानव बम बनने वाले चूतियों का मरना...... इसकी वजह से सब से बदतर हालात में इनकी खुद की कौम ही पहुंची है....
सीरिया, इराक, अफगानिस्तान कभी दुनियाँ के सबसे खुशहाल मुल्क थे..... इन जाहिलों ने आज उन्ह किस हाल में पहुंचा दिया....!
इन कायरों ने न खुद कभी जंग में कदम रखा न खुद की सुअरों की तरह पैदा की हुई डेढ़ दर्जन औलादों को फिदायीन बनाया.... क्यों क्या हूरों के साथ सोना इनके लिए प्रतिबंधित है.... अगर जन्नत इतनी ही हसीन है तो खुद पहले जाना चाहिए फिर अपने लौंडो, लौंडियों को भेजें...... नहीं भेजेंगे क्यों कि उस काम के लिए आसमानी मज़हम में चूतियों की कोई कमीं नहीं...
अफगानिस्तान में नाटो वालों ने एक फिदायीन पकड़ा उसने लोहे का लंगोट पहन रखा था.... पूछताछ में बोला के अगर धमाके में नुन्नू उड़ जाती तो हूरों का मज़ा कैसे लेता.... अब ऐसे बेहतरीन चूतिये किसी और कौम में मिल सकते हैं क्या....... अबे अगर लौंडियाँ और दारू जन्नत है तो मरने की क्या जरूरत जीते जी विजय माल्या को खुदा मान लो यहीं जन्नत दिख जाएगी!
दरअसल जन्नत और हूरें मरने वाले को तो नहीं मिलती उनके आकाओं, मौलानाओं, इन कायर सरगनाओं को जरूर मिलती है यहीं धरती पर... जो चूतिये बम के साथ फट जाते हैं उनकी बीवियां, बहनें, बेटियां इन कायर सरगनाओं की अय्यासी का सामान बनतीं हैं इनकी हूर बनतीं हैं...... बस यही जन्नत की हक़ीक़त है!
और अंतिम सत्य अगर ये कायर न होते तो आज भी उस धर्म को मान रहे होते जो इनके पूर्वजों का था..... इनकी कायरता, इनका डर ही इनका मज़हब है।
इतिश्री धन्यवाद!
लेखक : अजय सिंह