बुधवार, 27 मार्च 2019

ये युद्ध नही आसान भाग 2

#Mongolian_Job!!! Repost
एक देश है #मंगोलिया जिन लोगों ने मंगोलिया के बारे में सुना भी है तो
#चंगेज़_खान के देश के रूप में ही उसे जानते है....
मंगोलिया में ज्यादातर जनसंख्या बेहद गरीब और घुमंतू चरवाहों की है...
मंगोल अपनी विरासत पर मर मिटने वाली कौम है..... ज्यादातर कबीलाई समाज में बटे (हमारी जातियों की ही तरह) मंगोल अपने समुदाय या क़ाबिले के लिए बड़े समर्पित होते है...
कभी महान चंगेज़ खान, हलाकू खान की अगुआई में मंगोलों ने दुनिया का सबसे बड़ा और समृद्ध साम्राज्य खड़ा कर दिया था....
वो जांबाज़ लड़ाके होते है मंगोलिया में कहावत है "मंगोल बच्चा घोड़े की पीठ पर बैठ निशाना लगाने को ही जन्म लेता है........
खैर बात दो साल पुरानी है ....
मंगोलिया की अर्थव्यवस्था अचानक ध्वस्त हो गयी...भीषण महगाई से जनता त्राहि त्राहि करने लगी नौकरियों का लगभग अकाल था.....विदेशी कंपनियां जिनमें ज्यादातर चीन की थी अपनी पूंजी निकाल भाग निकली ....और इस मौके को भुनाने को मंगोलिया के पड़ोस में चीन जैसा धूर्त पड़ोसी तो था ही........
मंगोलिया का एक दुर्भाग्य है के वो एक लैंडलॉक देश है उसके पास न समुद्र तट है न बंदरगाह इन सबके लिए वो चीन पर निर्भर है....उनकी दक्षिणी भूमि जहां रेगिस्तान है वहीं उत्तरी बर्फीला पठार उपजाऊ भूमि काफी कम है.......
चीन ने मौका पा अपनी औकात दिखा दी अपने बंदरगाह आदि मंगोलिया के लिए बंद कर दिए और मंगोलिया पर कर्ज वापसी का दबाव बना अनैतिक शर्तें थोपने का पूरा बंदोबस्त कर लिया वो सीपेक के जरिये पाकिस्तान को घुटने के बल ला चुका था वही उद्देश्य उसका मंगोलिया में भी था......
पर मंगोलियन तो अलग मिट्टी से ही बने थे....
चंगेज़ जाग उठा .......और मंगोलों ने जो हर तरह से अपनी सरकार से नाराज़ थे एक आंदोलन सुरुं कर दिया....
ये आंदोलन सरकार के खिलाफ नहीं था .....उस गरीब देश के लोगों अपने गहने, बर्तन...यहां तक के अपने सबसे प्रिय और स्वाभिमान के प्रतीक अपने घोड़े तक बेच दिए.....
सिर्फ एक सप्ताह में सरकार को लोगों ने इतना पैसा दे दिया के चीन का कर्ज उसके मुंह पर वापस दे मारा गया.....और नए समझौते के तहत भारत से रूस के रास्ते अपनी जरूरत के समान मंगाना सुरुं कर दिया....
मंगोलिया सरकार ने मोदी को आमंत्रित किया और वहां के लोगों ने दिल खोल मोदी का स्वागत किया.....भारत को एक नया दोस्त मिल गया....जांबाज़ दोस्त।
खैर कहानी की मूल बात.... ये कहानी है उस देश के लोगों की जिनकी अर्थव्यवस्था दुनिया के पहले 100 देशों में भी नहीं.......कभी दुनियां की चौथी(पांच साल पहले ग्यारवीं) सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश के लोग यानी हम मंगोलों की तरह हो सकते है ....कभी नहीं.....उनके लिए उनका देश उनकी पहचान किसी दूसरी चीज से बड़ी थी....और हमारे लिए...?
हम टैक्स चोरी में दुनियां में पहले नंबर, नोट बंदी की लाइन ने हमारी देशभक्ति मूत बना बहा दी, हम आरक्षण के लिए, जात के लिए, पेट्रोल की कीमत के लिए तांडव मचा देंगे भले सरकार को कितनी भी गिरी शर्तों पर ये हासिल करना पड़े।
2019 में सत्ता में कौन बैठेगा कोई फर्क नहीं पड़ता पर काश देश का नागरिक मंगोलियन लोगों सा बन जाये.....!
खैर हिंदुस्तानियों से उम्मीद रखना मूर्खता ही है.... ख़ास कर हिंदुओं से!
पर लिखने के पैसे नही लग रहे इस लिए लिख डाला!

लेखक: अजय सिंह