मंगलवार, 26 मार्च 2019

भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के गद्दार कब तक मजे करेंगे

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माना कि भारत को अंग्रेजों के चंगुल से छुड़ाने के लिए राजगुरू, सुखदेव और भगतसिंह जैसे लाखों लोगों ने जान दे दी, पर होशियार तो वह होता है जो मौके का फायदा उठा ले और यह करामत भला कांग्रेस के अलावा और किसे आती है...?
शायद अंग्रेज लोग क्रांतिकारियों के तेवर देख कर समझ गये थे कि भागने के अलावा कोई रास्ता नहीं है इसलिए शांतिवार्ता और मध्यस्थता के लिए कांग्रेस नाम का एक मंच बनाया गया...!
तभी पके आम की तरह पता नहीं कहां से अपने बापू जी टपक पड़े और सुभाष चन्द्र बोस के कांग्रेस अध्यक्ष चुने जाने पर खेद व्यक्त कर के नेहरु को अध्यक्ष बनवा दिया...!
वैसे वास्तविकता ये है कि क्रांतिकारी मदर इंडिया के लिए लड़ रहे थे जान दे रहे थे लेकिन उन्हें फादर इण्डिया और अंकल इण्डिया मिल गए...!
इनके अनुसार अंग्रेज किसी भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव जैसे क्रन्तिकारी से नहीं डरे वो तो बापू के अहिंसावादी सत्याग्रह से डर कर भाग गए...!
सत्याग्रह भी इतना झक्कास वाला की अगर अंग्रेज पूछें की तुम्हारे क्रन्तिकारी मित्र कहाँ छिपे हैं तो उन्हें सब सत्य बता देते और जब अंग्रेज क्रांतिकारियों को काला पानी या फांसी की सजा दें तो देश के गुस्से को अहिंसा के नाम पर चुप करा देते...!
अब इतना अच्छा आन्दोलन करने वाला ही भागते हुए अंग्रेजों से उनका ताज लेकर अपने सर पहन सकता था, न कि बम गोली चलने वाले भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी...?
तो भाई आजादी का सेहरा कांग्रेस के सर पहुँच गया...!
टर्निंग पॉइंट तब आया जब एक तरफ कैंसर की आखिरी स्टेज पर खड़े जिन्ना ने देश का पहला प्रधानमंत्री बनने की जिद करी और दूसरी तरफ चाचा जी ने…!
तो अपने फादर इंडिया तो संत आदमी थे सो उन्होंने दोनों को खुश करने की युक्ति निकाल लिया और उन्हें अपने होनहार भाई देश के चाचा जी पर भी पूरा भरोसा था तो देश को अपने पुरखों की जागीर समझ कर दो हिस्से कर डाले...!
मुसलमानों का पाकिस्तान और बाकी सब का हिंदुस्तान...!
अहिंसा के पुजारी जिसको अंग्रेज टस से मस नहीं कर पाए उसे भला हो नाथूराम जी का जिसने गोली से छलनी कर दिया…!
इस तरह देश पिता विहीन हो गया अब चाचा जी ने देश सम्हाला और दलितों के मसीहा बाबा साहब आंबेडकर को मुखिया बना कर विदेशियों के संविधान का भारतीय संस्करण बनवाया जिसमे देश को जाति, धर्म, संप्रदाय, लिंग आदि में बाँट कर आरक्षण की हड्डियाँ डाल कर आपस में दंगे करवाने और स्वयं जनम जनम तक सत्ता का सुख भोगने का गणित तैयार करवाया गया...!
इसका लाभ उठा कर बाहुबलियों और माफियाओं ने सत्ता में पहुँच कर देश की हुकूमत सम्हालने में कांग्रेस का सहयोग करने लगे...!
बापू के मरने के बाद उनके सम्मान में बापू का फोटो डाक टिकट पर छापा गया जिसमे लोग थूक लगा कर लिफाफे पर रख कर घूँसा मरते थे और साथ ही नोट पर भी बापू का हँसता हुआ फोट छाप दिया गया जिसे थूक लगा लगा कर गिनते हैं...!
बापू के फोटो पाने के लिए लोग कितनी हिंसा करते हैं  कभी शराबी उसे फाड़ता है तो कभी अय्याश उसे वैश्या पर लुटाता, और कभी लूट की फोटो ऐसी गन्दी-गन्दी जगह पर छिपाता है कि बेचारे बापू को भी अपनी गलती का एहसास हो जाता होगा इस दुर्गति को देख कर...!
फिर ये नजारा देख कर कुछ पूज्य जनों की आत्मा त्राहिमाम कर उठी और उन्होंने बापू के नोटो पर छपी फोटो को भारत के हम जैसे बेवकूफों के चंगुल से छुड़ा कर वातानुकूलित स्वच्छ स्विस बैंक में सुरक्षित करवा कर बापू को अपवित्र होने से बचा लिया...!
एक और बात समझने योग्य है जो किसी स्थान का गुंडा या बदमाश होता है अगर उसे ही पुलिस का दारोगा बना दिया जाये तो वह अपराधियों को आसानी से पहचान सकता है और उसे अड्डों का भी पता होता है...!
इस हिसाब से अगर देखा जाये तो 1947 से 2014 तक सत्ता बिलकुल सही और जायज लोगों के हाथ में थी...!
लेकिन मोदी जैसे सिरफिरे ने उनकी दूरदर्शिता का अंदाजा किये बिना ही भर्ष्टाचार के नाम पर उन पूज्य लोगों पर कीचड़ उछाल कर उसे छीन लिया हैं...!
आपको याद होगा कि बापू के 3 बन्दर थे...!
एक आँख बंद वाला...बुरा मत देखो...!
चाहे जितने घोटाले या आतंकवादी हमले हों...!
दूसरा कान बंद वाला...बुरा मत सुनो...!
चाहे लाखों लोग गरीबी, भर्ष्टाचार और लूट की मार से चिल्लाते रहें...!
तीसरा मुंह बंद वाला...बुरा मत बोलो…!
2014 से पहले के प्रधानमंत्री और आलाकमान को ही देख लीजिये...!
लेकिन गड़बड़ तो तब हो गई जब पता नहीं कहां से मोदी जी चौथा बन्दर बनकर आ गए और इनके हाँथ पकड़ कर बांध दिए और बोले बुरा मत करो...!
अरे...मैं भी कितना भुलक्कड़ आदमी हूँ, आज तो अपने राजगुरु, सुखदेव जी और भगत सिंह जैसे महान और बहादुर क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देनी चाहिए है...!
जबकि मेरा मानना है कि उन्हें श्रद्धांजलि नहीं बल्कि ताबड़तोड़ प्रतिशोध की जरुरत है, उनके बलिदानों को सकूँन तब मिलेगा जब उन्हें धोखा देने वालों को उनके अंजाम तक पहुँचाओगे...!
यदि श्रद्धांजलि ही देनी है तो हर अपराध की खोज खबर अपने ही दल में बैठे दिग्गजों से हर पल रखने वाली और हमसे असमय हमारे भगतसिंह, राजगुरु और सुखदेव जैसे कोहीनूरों को छल से छिनने वाले खानदानी गिरोह को दो...!
उन्हें उखाड़ फेको जो आजादी के बाद से 65 सालों तक अंग्रेजो के शासन जैसी सड़ांध फैलाये हुए थे, जिसे मिटाने के लिये हमारे ये तीन जाबाज अपने जान की बाज़ी लगा दी थी...! 
वर्ना आजादी की लड़ाई में मरने वालों को तो आप वर्षो से श्रद्धांजलि दे रहे हैं...कौन सा कद्दू में तीर मार लिया, जो आज मार लोगे...?
आखिर कब तक हम नामर्दों की तरह अपनी नपुंसकता को श्रद्धांजलि का नाम देकर उनकी वीरता और बहादुरी को कलंकित करते रहेंगे...!
जय हिंद...!

साभार 
राज तिवारी

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