शनिवार, 23 मार्च 2019

BSNL के साथ मेरा अनुभव

Bsnl की चर्चा आयी गयी हो गयी लेकिन bsnl का मेरा अनुभव मेरे जेहन में आज भी ताजा हो जाता है।
बात उन दिनों की जब में ऑनलाइन वर्क करता था । मेरा पूरा काम ही इंटरने बेस्ड था। उस समय सब से सस्ता और अच्छा bsnl ही था। क्योंकि प्राइवेट कंपनिया या तो महंगा डेटा देती थी या सर्विस घटिया थी।
तो मैं पूरे डोकुमेंट लेकर bsnl के आफिस में गया लैंडलाइन फोन और ब्रॉडबैंड अप्लाई करने के लिए। वाकायदा मुझसे पूछा गया कि लैंडलाइन क्यो चाहते हो इसका क्या करोगे और bsnl ही क्यो चाहिए। मैने कहा बिजनेस मैन हूँ ऑनलाइन काम करता हूँ घर से ही। अधिकारी बोल रहा था अच्छा बिजनेस मैन हो।
लैंडलाइन लेने जाओ तो अधिकारी ऐसे देखते जैसे कोई भी शिर उठाए लैंडलाइन लेने चला आता है
तो मेरी फ़ाइल दो महीने bsnl के आफिस में पड़ी रही लेकिन मुझे फोन नही मिला।
हर बार कुछ न कुछ जवाब मिल जाता कि अभी कारीगर नही है अभी केबल नही है।
एक बार तो बोला कि लोगो की डेढ़ साल से फ़ाइल पड़ी हैं तुम्हारा तो दो महीने ही हुआ।
मैने पूछा क्या केबल नही आएगा तो कनेक्शन ही नही मिलेगा तो मुझे जवाब मिला तो तुम्हे कभी नही मिलेगा। थोड़ा भी ऊंची आवाज में पोलो तो सब आ के घेर लिये। समझाने लगे सांति से बात करो तुम्हारी अकेले की समस्या नही है जब सब का होगा तुम्हारा भी हो जाएगा।
ये तो अच्छा हुआ कि मेरे पापा ने पहचान निकाली उनके मित्र का मित्र ही bsnl का एम्प्लोयी था उसकी वजह से दो दिन में में मेरा लैंडलाइन आ गया और चालू भी हो गया नही तो कभी मिल ही न पाता।
और तो और साठ साठ हजार की सैलरी पाने वाले वर्कर भी मुह खोल रुपया मांगते है जब भी आते हैं।
जब सेलरी मिल ही रही है। इंक्रीमेंट मिल ही रहा है भत्ता मिल ही रहा है पेंसन मिलने ही वाली है कुछ भी हो तो कर्मचारी यूनियन है ही। नौकरी से निकाले जाने का कोई डर नही है। कंप्लेन करो तो कोई सुनने वाला है नही क्योकि ये संगठित लूट है लूटेरो की जमात है। ऊपर से नीचे तक सब मिल कर लूट रहे थे।
यहां तक की बड़े अधिकारी एयरटेल , आइडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियो से पैसा लेकर ऐसा करते थे जिससे व्यक्ति प्राइवेट कंपनियों के पास जाने के लिए मजबूर हो जाये। अब ऐसे लोगो के समूह को सरकार कब तक झेलेगी।
कभी भी bsnl में जाओ तो वहाँ का अधिकतर स्टाफ बूढ़े लोगो का दिखेगा। जो जवान भी है तो बूढ़े लोगो के ही पद चिह्नों पर चलते दिखेगे और उनसे भी अधिक आलसी पना करते दिख जाएंगे।
ऐसी कंपनी बन्द हो जाये वही अच्छा है।
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माधव त्रिपाठी की फेसबुक वॉल से साभार