रविवार, 31 मार्च 2019

नमामि गंगे

"नमामि गंगे : गंगा नदी को स्वच्छ, निर्मल बनाने का एक संकल्प"
गंगा नदी को स्वच्छ, निर्मल बनाने का मोदी सरकार का संकल्प जो अब सिद्धि को ओर अग्रसर है.
 नमामि गंगे कार्यक्रम एक एकीकृत संरक्षण मिशन है, जिसे जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा 20,000 करोड़ रुपये के बजट व्यय के साथ 'फ्लैगशिप प्रोग्राम' के रूप में शुरू किया गया ताकि राष्ट्रीय नदी गंगा को प्रदूषण से मुक्त कर उसका संरक्षण और कायाकल्प किया जा सके.
क्या गंगा नदी साफ हो गई ?
यह भावनात्मक प्रश्न अक्सर मोदी विरोधी मोदी सरकार को नीचा दिखाने के लिए मोदी समर्थको से पूछते रहते है, अब चूंकि हमको इस विषय में जानकारी ना होने के कारण अक्सर इसका जवाब देने में हम खुद को बैकफुट पर महसूस करते है.
तो आइए इस सम्पूर्ण योजना के बारे में जानते है और फ्रंटफुट पर जवाब देकर इन कबाड़ियों के छक्के छुड़ाते है. 
 नमामि गंगे प्रोजेक्ट के कार्यान्वयन को 3 भागो में बांटा गया है, और इस प्रोजेक्ट के पूरा होने की अवधि 10 वर्ष निर्धारित की गई है.
 प्रवेश स्तर की गतिविधियां (तुरंत प्रभावी रूप से दिखाई देने वाली)
 माध्यम अवधि की गतिविधियां (5 वर्ष की समय सीमा में लागू होने वाली)
 दीर्घ अवधि की गतिविधियां (10 वर्ष की समय सीमा में लागू होने वाली)
 गंगा नदी से जुड़े आंकड़े :
 लम्बाई : 2500 किलोमीटर
 राज्य व जिलें जहां से गंगा नदी गुजरती है : 5 राज्य & 52 जिले
 सीवेज डिस्चार्ज : 1500 मिलियन लीटर प्रति दिन
 औद्योगिक अपशिष्ट डिस्चार्ज : 500 मिलियन लीटर प्रति दिन
 गंगा को प्रदूषित कर रहे गंगा किनारे स्थित उद्योगों की संख्या : 700
 गंगा किनारे बसे गांव की संख्या : 5169
 नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत अब तक क्या हुआ है :
5 राज्यो में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत कुल 267 विभिन्न परीयोजनाएं शुरू की गई है, नमामि गंगे प्रोजेक्ट की कुछ प्रमुख उपलब्धियां :
 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता बढ़ाना व नए प्लांट का निर्माण :
 उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल राज्यों में कार्यान्वयन के तहत 142 सीवरेज प्रबंधन परियोजनाएं शुरू की गई. जिसमे से 35 परियोजना पूरी हो चुकी है.
 इन राज्यों में 90 नई सीवरेज प्रबंधन परियोजनाएं शुरू की गई है, जो 2213.85 (एमएलडी) की सीवरेज ट्रीटमेंट क्षमता स्थापित करने के लिए निर्माणाधीन है.
 हाइब्रिड एन्युइटी पीपीपी मॉडल पर आधारित कई परियोजनाएं शुरू की गई हैं.
 रिवर फ्रंट का निर्माण :
 1 रिवर फ्रंट डेवलपमेंट प्रोजेक्ट था जो पूरा हो चुका है.
 घाट व शवदाह गृह का निर्माण :
 घाट और श्मशान घाट के निर्माण/आधुनिकीकरण/नवीनीकरण के लिए  59 प्रोजेक्ट शुरू किए गए है, जिनमें से 31 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके है.
 नदी की सतह की सफाई :
 11 स्थानों पर घाट व नदी की सतह पर तैरते ठोस कचरे को तकनीकी उपकरणों द्वारा साफ किया जा रहा है.
 जैवविविधता संरक्षण :
 कई जैवविविता संरक्षण परियोजनाएं चलाई जा रही, जैसे : जैवविविधता संरक्षण, गंगा कायाकल्प, गंगा नदी में मछली व मत्स्य संरक्षण, डॉल्फिन संरक्षण शिक्षा कार्यक्रम शुरू किया गया.
 5 जैवविविधता केंद्र देहरादून, नारोरा, इलाहाबाद, वाराणसी और बराकपुर प्राथमिकता प्रजाति की बहाली के लिए विकसित की गई.
 वनिकरण :
 वन्यजीव संस्थान के माध्यम से गंगा के लिए वानिकी हस्तक्षेप.
 केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान और पर्यावरण शिक्षा केंद्र शुरू किया गया.
 गंगा के लिए वानिकी हस्तक्षेप 2300 करोड़ रुपये की परियोजना लागत पर 5 साल (2016-2021) की अवधि के लिए वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून द्वारा तैयार विस्तृत परियोजना रिपोर्ट के अनुसार निष्पादित की गई है.
 औषधीय पौधों के लिए उत्तराखंड के 7 जिलों में कार्य शुरू किया गया है.
 जन जागरूकता गतिविधियां :
 कार्यक्रम में सार्वजनिक पहुंच और जन भागीदारी का एक मजबूत आधार तैयार करने के लिए घटनाओं, कार्यशालाओं, सेमिनारों और सम्मेलनों और कई आईईसी गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की गई.
 'नमामि गंगे' प्रसंग गीत (थीम सॉन्ग) व्यापक रूप से चलाया गया.
  रैलियों, अभियानों, प्रदर्शनियों, श्रम दान, सफाई अभियान, प्रतियोगिताओं, वृक्षारोपण अभियान और संसाधन सामग्री के विकास एवं वितरण के माध्यम से विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया.
 प्रभावी औद्योगिक निगरानी :
 961 निहायती प्रदूषित उद्योग (जीपीआई) में रीयल टाइम एफ़्लुएंट मॉनिटरिंग स्टेशन (ईएमएस) लगाया गया है.
 251 जीपीआई को समापन नोटिस जारी किया गया है, और गैर अनुपालन जीपीआई को बंद करने के दिशा निर्देश जारी किए गए है.
 गंगा ग्राम :
 7 आईआईटी की सहायता संघ गंगा नदी बेसिन योजना की तैयारी में लगी है और 65 गांवों को मॉडल गांवों के रूप में विकसित करने के लिए 13 आईआईटी द्वारा गोद लिया गया है.
 गंगा नदी के किनारे स्थित सभी गांव खुले में शौच मुक्त हो चुके है.
 स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन नमामि गंगे, गंगा कायाकल्प के लिए पूरी दुनिया में उपलब्ध सर्वोत्तम ज्ञान और संसाधनों की सहायता से गंगा को प्रदूषण मुक्त कर रहा है.
 ऑस्ट्रेलिया, यूनाइटेड किंगडम, जर्मनी, फिनलैंड, इज़राइल आदि जैसे देशों ने गंगा कायाकल्प के लिए भारत के साथ सहयोग करने में रुचि दिखाई है.
 विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए, जैसे - मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, रेल मंत्रालय, नौवहन मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय, आयुष मंत्रालय, पेट्रोलियम मंत्रालय, युवा मामलों एवं खेल के मंत्रालय, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय और कृषि मंत्रालय शामिल है.
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