शुक्रवार, 29 मार्च 2019

हिन्दुओ की आस्था

#ये_बात_है_के_हस्ती_मिटती_नहीं_हमारी!
कुम्भ प्रयागराज में सज चुका है सालों बाद प्रयागराज अपनी दासता की यादों को धो कर कुम्भ में दुनियां भर के लोगों का स्वागत कर रहा है यहाँ बहुत लोग आएंगे, बहुत प्रकार के लोग आएंगे...... कुछ साधुओं के अखाड़े पधारेंगे अपनी दिव्यतापूर्ण उपस्तिथि से हिंदुत्व के उत्सव को अनुग्रहित करेंगे, कुछ देश विदेश से पहुंचे पर्यटक होंगे जिन्ह इन अखाड़ों के प्रदर्शन, मेले की भीड़, भारतीय संस्कृति को देखना, अपने कैमरों में कैद करना होगा, वोट की तलाश में राजनेता भी पहुंचेंगे....... और साथ ही पहुंचेगा भदेस हिन्दू भारत.... जिसे भीड़ के बीच खुद का स्थान खोजना है, जिसका एकमेव उद्देश्य #गंगा_मैया_में_स्नान करना है, जिसका अगाध भरोसा है के ये स्नान उसके लोक परलोक का कल्याण करेगा.... ये वही लोग होंगे जिनकी भदेस बातें आपको हँसने योग्य लग सकती है, इनका पहनावा, घिसे, फटे कपड़े देख आप नाक सिकोड़ सकते हैं, अगर ये आपके पास कहीं आकर बैठ जाएं तो आपको अपने सामान को बार बार देखना पड़े क्यों के गरीबी स्वतः चोर नज़र आने लगती है, सर पर गठरियाँ उठाये, पीठ पर बुजुर्गो या गोद में बच्चे संभाले..... इस भदेस हिंदुत्व की दूसरी पहचान भी है इन्ह आप दलित हिन्दू, पिछड़ा हिन्दू भी कह सकते हैं ये वो लोग हैं जो किसी बीमारी से बिना ईलाज मरे बुजुर्ग की अस्थियों को त्रिवेणी में प्रवाहित करने गांव के साहूकार से कर्ज ले वहां पहुंचते है..... आप इसे भले मूर्खता कह लें पर इसमें अडिग आस्था शामिल होती है.... ऐसी आस्था जिसे न लालच कभी भंग कर पाया, न सत्ता की चाह, न हीं जीवन सुखों को पाने की सामान्य मानवी कामना..... #अभावों_में_अड़िग_आस्था.... सच्चा हिंदुत्व, नारों, जलसों, सम्मेलनों से परे पोस्टर, बैनर, विज्ञापन रहित..... यही वो असली गुणक था जिसने 1200 साल मलेक्ष राज में इस धर्म की पताका झुकने नहीं दी...... क्या आपको मेरी बात में अतिशयोक्ति नज़र आरही है....
तो कभी धार्मिक मेलों, कथा पंडालों, मंदिरों में होने वाली भगदड़ या अन्य तरह की दुर्घटनाओं के मृतकों और घायलों के नाम जाति पर गौर करके देखें।
कभी सावन के महीने में सौ सौ मील दूर से कांवड़ लाद भोले नाथ का जलाभिषेक करने वालों से उनकी जाति पूछें।
कभी गणेश पंडाल, राम बारात, होली के रंगे चेहरों, दुर्गा झांकी में समिलित और उसमें नाच गा रहे लोगों की जाति जानें.......
यकीन करें सबसे ज्यादा दलित समुदाय के लोग होंगे, वे सवर्णो से कहीं ज्यादा उत्साही हिन्दू हैं, वो ईस्वर में भरोषा और उम्मीद रखने वाले लोग हैं।
फिर वो लोग कौन हैं जो दलित बन भगवान की तस्वीर पर चप्पल मार रहे है, जो मूर्तियों पर पैर रख रहे है, और साथ ही वो कौन हैं जो फ़ोटो शॉप के कमाल से "इस मंदिर में दलितों का प्रवेश निषेध" वाली फोटो डाल रहे हैं.....ये आतंकी हैं जो तुम्हें पहले बांटेगे फिर काटेंगे!!!
जातियां, वर्ण अगर हिंदुत्व की कमजोरी दिखतीं हैं तो ये ही हिंदुत्व की सबसे बड़ी ताक़त भी हैं ...... यही वो ताक़त है जिसने रोज खुद के छू भर जाने पर शहीद मंगल पांडेय की गलियां खाने वाले शहीद मातादीन भंगी को उनकी मौत के बाद अंग्रेज़ो के प्राणों का प्यासा बना दिया...... भला मातादीन कैसे उन गोरों को क्षमा कर देते जिन्हों ने उनके पांडेय जी को फांसी चढ़ाया........ #हिंदुत_की_जड़ें मिट्टी के इंसानों ने बहुत गहरी और बहुत मजबूत थाम रखी हैं...... किसी अब्रह्मिक जहालत के तूफान की हैशियत नहीं जो इन्ह हिला सके.... हाँ कुछ पतियों के गिरने से गलतफ़हमी चाहे जो पाल सकता है....
मगर कुछ उखाड़ नहीं सकता दौरे जहां हमारा।।।।।

लेखक : अजय सिंह