शनिवार, 23 मार्च 2019

कांग्रेस और सुप्रीम कोर्ट का ये रिश्ता क्या कहलाता है

सरकार को जाचं करवाना  चाहियेकांग्रेस राज में कोई भी केस सुप्रीम कोर्ट में जाने के पहले ही सब कुछ मैनेज हो जाता था .. किस जज की बेंच में मामला जायेगा और वो जज क्या फैसला देंगे ...
*कांग्रेस की 70 सालो की सफलता का यही सबसे बड़ा राज है की उसने मीडिया और न्यायपालिका सबको मैनेज करके राज किया* ..
*गुजरात हाईकोर्ट के रिटायर जज जस्टिस एमबी सोनी ने इसका खुलासा तब किया जब उन्होंने पाया की गुजरात दंगो के सम्बन्धित कोई भी याचिका जो तीस्ता सुप्रीम कोर्ट में दायर करती है वो सिर्फ जस्टिस आफताब आलम के बेंच में ही क्यों जाती है जबकि रोस्टर के अनुसार वो किसी और के बेंच में जानी चाहिए .. फिर उन्होंने और तहकीकात की तो पता चला की रजिस्टार को उपर से आदेश था की तीस्ता का केस जस्टिस आफ़ताब आलम के बेंच में भेजा जाए और इसके लिए मस्टर रोल और रोस्टर को बदल दिया जाये* .. *फिर उन्होंने और तहकीकात की तो पता चला की जस्टिस आफताब आलम की सगी बेटी अरुसा आलम तीस्ता के एनजीओ सबरंग में पार्टनर है और उस समय के केबिनेट मंत्री और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की पत्नी भी उसमे है* ..
*फिर उन्होंने इसके खिलाफ चीफ जस्टिस को पत्र भेजा और जस्टिस आफ़ताब आलम और कांग्रेस नेता और हिमाचल के मुख्यमंत्री की बेटी जस्टिस अभिलाषा कुमारी के 10 फैसलों की बकायदा आठ हजार पन्नो में विस्तृत विबेचना करके भेजा* .. *की इन लोगो ने खुलेआम न्यायपालिका का बलात्कार किया है*
*फिर जाकर इस गैंग को गुजरात के हर एक मामले से अलग किया गया* ..
*अगर जस्टिस एमबी सोनी नही होते तो कांग्रेस सरकार नरेंद्र मोदी को फंसाने की पूरी प्लानिंग कर चुकी थी
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क्या कभी आपने राहुल गाँधी, लालू यादव, सीताराम येचुरी, मायावती, अखिलेश, ममता, महबूबा, और विपक्ष के नेताओं को एक दूसरे को चोर बोलते सुना है ?
नहीं !!!
जबकि इनमें से कुछ को सजा हो चुकी है, कोई जेल में है, कोई बेल पर है और कुछ पर कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं मगर ये एक दूसरे को चोर नहीं बोलते !
परन्तु मोदी जिस पर कोई आधिकारिक आरोप नहीं है, कोई FIR नहीं है, कोई मुकदमा भी नहीं चल रहा है, किसी कोर्ट ने किसी जाँच का आदेश भी नहीं दिया, उसे ये सारे नेता चोर बोल रहे हैं !
धन्य है *** समझ और देश के प्रति  जिम्मेदारी का भाव।

राजीव अग्रवाल की फेसबुक वाल से साभार