शुक्रवार, 29 मार्च 2019

आज के अर्जुन और उनके गांडीव!!

इराक़ का रमादी शहर एक घर की छत पर मशीन गन के साथ दो आतंकी अमेरिकन सैनिकों के काफ़िले के गुज़रने के इंतज़ार में घात लगाए बैठे थे जो वहां से बस गुज़रने ही वाला था...…. उदेश्य अधिक से अधिक अमेरिकी सैनिकों की जान लेना... ये हमला घातक और भयावह होता..... लेकिन इन आतंकियों से ढाई किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पर मौत इनपर बेहद करीब की नज़र गढ़ाए थी एक बिल्डिंग की छत पर अपनी .338 Lapua Magnum स्नाइपर राइफल के साथ #Chris_Kyle नाम का एक अमेरिकन सैनिक तैनात था.... उसकी नज़र इन दोनों पर थी रमादी की तेज धूप और सड़कों से उड़ती धूल उसकी नज़र को धुंधला रही थी लक्ष्य बेहद दूर था इतना दूर के जिसे इससे पहले कभी किसी स्नाइपर ने नहीं भेदा था, उसकी बंदूक से निकली गोली को भी इस दूरी को तय करने में तीन सेकेंड का समय लगता यानी दूसरा निशाना उसे सिर्फ तीन सेकेंड में भेदना था.... आप Chris Kyle पर उस समय मौजूद दबाव की सिर्फ कल्पना मात्र कर सकते है..... पर वह पहले भी एक या दो नहीं सैकड़ों आतंकियों को मार चुका था अमेरिकन सेना के उसपर यक़ीन का अनुमान इससे पता चलता है के उसे चार बार इराक की जंग में उतारा गया......
खैर Chris Kyle ने ट्रिगर दबाया और तुरंत बोल्ट खींच कर दूसरे लक्ष्य पर भी गोली दाग दी रिजल्ट हमेसा की तरह सटीक था दोनों आतंकियों की खोपड़ी में क्रिस की गोली घुस चुकी थी....... अमेरिकन सैन्य काफ़िला आराम से वहां से गुज़र चुका था.... पूर्ण सुरक्षित!!!
Chris Kyle का कहर ऐसा था के इराक़ के आतंकी उन्ह रमादी का शैतान (#Devil_of_Ramadi) बुलाते थे ....अपने काम की इतनी सटीकता के 300 से ज्यादा आतंकी मौत की नींद सुलाए जिनमे 160 को सिर्फ एक सप्ताह में ही निशाना बनाया....... खैर इस कहानी के हीरो अगर क्रिस हैं तो उतना ही महत्व उन #अत्याधुनिक_स्नाइपर_रायफ़ल का भी है जिन्हें क्रिस इस्तेमाल करते थे अथवा उनकी तरह ही ब्रिटिश, अमेरिकन या इज़राइली सैनिक इस्तेमाल करते हैं यहां तक कि पड़ोस के नंगे भूँके मुल्क पाकिस्तान के सैनिकों के पास भी अत्याधुनिक स्नाइपर रायफ़ल मौजूद हैं जिनका शिकार कई बार हमारे सैन्य कर्मी होते हैं..... ये वो हथियार है जो कई बार सिर्फ एक गोली से पूरे युद्ध का परिणाम बदल देता है...... जैसे पानीपत में सिर्फ एक तीर ने राव हेमू की हार और बैरम खां की जीत तय कर दी थी.... सिर्फ एक सटीक निशाना.....!
पर इस सब में सबसे कमाल की बात यही है के जो बात इस कहानी को पढ़ कोई भी सामान्य भारतीय आराम से समझ सकता है उसे भारत की सरकारों को समझने में कई दशक लग गए भारत की पूर्व की सरकारों ने किस तरह सेनाओं को कमज़ोर किया उसका उदाहरण भी है ये..... आपको जानकर आश्चर्य होगा के भारत की सेनाएँ अब तक दूसरे विश्व युद्ध और सोवियत के जमाने की स्नाइपर रायफ़ल इस्तेमाल करती रही हैं, कर रही हैं .... जिसमें 1958 में बनी #Dragunov sniper rifle
और 1969 की Steyr SSG 69 शामिल हैं और कुछ तो उससे भी पुरानी जर्मन माउज़र रायफ़ल हैं.... इन की मारक छमता 500 से 800 मीटर और एक्यूरेसी 30% से 40% होती है......!
पिछले चार सालों में जिस तरह भारतीय सेनाओं का आधुनिकी करण हुआ उसमें भारत की इस कमज़ोरी को भी दूर किया गया आज भारतीय सेना के हाथ में भी अमेरिका और इज़राइल की बनी कुछ बेहतरीन स्नाइपर रायफ़ल आ चुकी हैं जिनमे इस श्रेणी की सबसे बेहतरीन #Barrett_Model_98B  .338 Lapua Magnum  भी शामिल है जिसे इराक में Devil of Ramadi Chris Kyle ने अपने शिकारों को खत्म करने के लिए इस्तेमाल किया.... दुनियां के बेह्तरीन स्नाइपर Chris Kyle सिर्फ 38 साल की उम्र में 2013 में अपने ही एक मनोविक्षिप्त सैन्य साथी की गोली का शिकार हो गए पर इस हुनर ने उन्ह जो ख्याति दी वो अमर है..... उम्मीद है भारतीय सेना भी उनके हथियार से अपने दुश्मनों का वैसा ही शिकार करेगी....!
पर ये सवाल तो रहेगा ही जो हथियार भारतीय सेना को 20 साल पहले मिलने थे वो आज क्यों मिल रहे हैं...... इस देरी के पीछे आखिर मंसा क्या थी!!!!