शुक्रवार, 29 मार्च 2019

तेजस एयरक्राफ्ट

#तेजस_48_साल_का_युवा_फाइटर_एयरक्राफ्ट
रॉफेल पर एक बदजात की बकैती ने कुछ ऐसा देश में और मीडिया में सोर मचाया के लोग भूल ही गए के अपना एक स्वदेशी कॉम्बेट एयरक्राफ्ट तेजस भी है... और उसका हाल क्या है आजकल ...... कोई नाम ही नहीं लेता उसका जबकी तेजस को रॉफेल से आठ गुनी संख्या में भारत की एयरफोर्स में शामिल किया जाना है.....! राहुल गांधी भले 48 साल में जबरन खुद को युवा कहे लेकिन तेजस वास्तविक तौर पर 48 साल का युवा ही है.....
बात थोड़ी अजीब है पर सच है 1969 में सबसे पहले भारत सरकार ने प्रस्ताव रखा के देश के पास उसका अपना फाइटर एयरक्राफ्ट होना चाहिए लेकिन इस प्रस्ताव को तीन चीज़े एक: भारत ये एयरक्राफ्ट बनाये या नहीं, दो: HAL इसे बना सकता है या नहीं,तीन: एयरफ़ोर्स इसे खरीदेगा या नहीं तय करने में समय लगा पूरे 16 साल का.... जी हां 16 साल...... 1985 में जब एयरफोर्स के लिए Mig-21 उड़न ताबूत साबित होने लगा और उसने नए विमान की मांग रखी तब सरकार ने इसकी डिज़ाइन, R&D की इजाज़त और थोड़ा बहुत बजट दिया पर रूस से मिलने वाली मोंटी दलाली ने इस काम को ठंडा ही रखा नतीजा सिर्फ विमान की डिज़ाइन फाइनल होने में 10 साल लगा दिए गए 1995 में PV नरसिंह राव साहब ने इसपर थोड़ा ध्यान दिया तो इसकी डिज़ाइन का काम हो सका लेकिन फाइनल हुए डिज़ाइन पर काम 1999 तक HAL में निल बटा सन्नाटा ही रहा फिर सरकार ने डंडा पेला तो काम आगे बढ़ा तो 2001 मैं तेजस का  पहला Technology Demonstrators बनकर तैयार हुआ तो अगले दो साल में सिर्फ दो Prototype Vehicles बनकर तैयार हो सके यानी चार तेजस अब आसमान में थे..... एयरफोर्स लगातार मिग21 के गिरने का खामियाज़ा भुगत रही थी और नए विमानों की जरूरत चरम पर थी दुर्भाग्य से इसके बाद 10 साल देश पर चोरों का राज रहा उनकी आंख इस जरूरत को दलाली में बदलने पर टिक गई और इस बीच तेजस के Limited Series Production ने सभी टेस्ट क्लियर कर लिए पर बात Initial Operating Clearance पर ही तीन साल अटका कर रखी गयी....... लगातार देरी पर उठ रहे सवालों और एयर शो में बेहतर प्रदर्शन से बने दबाव के बीच तेजस को IOC अंततः 2011 में मिला जरूर पर आगे की कार्यवाही कछुए की रफ़्तार से ही चली ..... और अगले तीन साल फिर बिना किसी ख़ास प्रगति के गुज़र गए तेजस इस बीच 3000 से ज्यादा उड़ानों और 2000 घंटों हवा में रहने का अनुभव पा चुका था वो भी बिना किसी दुर्घटना या नुक़सान के..... ये अपने आप में कमाल की उपलब्धि थी जिसे अमेरिका रूस के नामी लड़ाकू विमान भी नहीं कर सके थे..... तेजस को फिर टॉप गियर लगा 2014 के बाद जब एयरफोर्स द्वारा लगातार उसकी टेस्टिंग की गई प्रोडक्शन की रफ्तार बढ़ाने का दबाव HAL पर पड़ा..... तेजस ने हवा में तेल भरने की छमता हासिल की, सभी हथियारों को आज़माया, हर मौसम में उड़ान भरी, युद्ध अभ्यास में भाग लिया, साथ ही भारत के बाहर भी एयर शो में भाग लिया........ चार साल लगातार तेज़ी से काम का नतीजा भी निकला और जनवरी 2019 में Centre for Military Airworthiness and Certification ने तेजस को युद्ध में उतारने लायक मान कर उसके फुल स्केल प्रोडक्शन की इजाज़त दे दी है HAL ने एयरफोर्स को चार पूरी तरह तैयार तेजस सौंप दिए हैं और 2019 के अंत तक ये संख्या 8 होगी और तेजस भारत की सुरक्षा में पूर्णतया तैनात हो जाएगा...... 2025 तक भारत की सेना के पास 124 तेजस होंगे किसी भी चौथी पीढ़ी के लड़ाकू विमान से बेहतर तेजस..... इसके साथ ही रोक दिया गया तेजस MK2 का काम भी पूरा होने को है और 2019 के अंत तक तेजस MK2 भी अपनी पहली उड़ान भरेगा......!
इसके साथ ही 2014 में पिछली सरकार द्वारा बंद कर दिए गए AMCA प्रोजेक्ट को भी पुनः जीवित किया गया और नवीन डिज़ाइन के साथ आज 6 AMCA एयरक्राफ्ट निर्माण और टेस्टिंग के अलग अलग दौर में हैं 2019 के अंत अथवा 2020 की सुरुआत में AMCA अपनी पहली उड़ान भरेगा..... इसमें देखने वाली चीज यह है के तेजस को इस स्तर तक आने में 30 साल लगे वहीं AMCA को सिर्फ 5 साल से कम जबकि AMCA पांचवी पीढ़ी का एयरक्राफ्ट है......... सवाल सिर्फ इतना है के वो कौनसी वजह है जो उसी HAL, HAL के वही कर्मचारी, सेना, DRDO के काम की रफ्तार पिछले पांच साल में कई गुना बढ़ा देती है......और सालों तक काम की रफ्तार को कछुए की चाल से चलने पर मजबूर करने के पीछे की वजह और कीमत आखिर क्या रही!
मोदी कहते है भ्रष्टाचार के लिए अटकाने, लटकाने, भटकाने का तरीक़ा इस्तेमाल होता है और तेजस इसका सबसे बेहतरीन उदाहरण है....!

साभार 
श्री पवन अवस्थी