सोमवार, 25 मार्च 2019

ये तो होना ही था

#आखिरी_दृश्य_इराक
आईएस आतंकी - क्या नाम है तेरा काफिर ?
भारतीय-- 'रमेश कुमार त्रिवेदी' जान बख्श दें..मैंने सालो मंदिर में पूजा कराई.. घंटा बजाया..आपकी ताबेदारी भी की...सेकुलर हूँ ,हुज़ूर ...
आईएस आतंकी - ले अब घंटा ही बजा...साले काफिर...ठाये.. ठाये..
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आईएस आतंकी- क्या नाम काफिर तेरा ?
भारतीय - मेरा नाम शमशेर सिंह चौहान है.. हुज़ूर ...देश के लिए खूब लड़ाइयां लड़ीं... पाकिस्तान को हराया...जान बक्श दें...
आईएस आतंकी- ओह गलीज़ काफिर.. हमारे पाकिस्तानी मोमिन बिरादरों पर गोली चलाया..ठाये.. ठाये..
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आईएस आतंकी - काफिर के बच्चे क्या नाम तेरा..क्या करता था तू मरदूद ?
भारतीय--हुज़ूर सिख हूँ...हिन्दू नहीं हूं...मुझे छोड़ दें...बंदा परवर...मोमिन की नौकरी करता हूँ,ऊँठ नहलाता हूँ...गोश्त काटता हूँ...
आईएस आतंकी- साले...जब मोमिन नहीं, तो काफिर ही तो हुआ तू.. ऊँठ नहला या गोश्त काटने से 'अशरफुल मख़लूक़ात' मोमिन नहीं बन गया तू.. मर साले...ठाये...ठाये..
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मोहन लाल -हुज़ूर मेरी जान बक्श दें...मैं तो आपके ऊँठों की खाल निकाल कर जूते बना कर आपको पहनाता था...मैंने तो हिन्दू मज़हब तक छोड़ दिया है...इंडिया में रहता था तो मोमिन के साथ मिलकर मोर्चा निकालता था...नारा लगाता था...मोमिन-दलित भाई-भाई, हिन्दू कौम कहाँ से आई !!...भाईजान...मैं मोमिन हो चुका हूँ....मुझे बक्श दे हुज़ूर....
आतंकी- खतना दिखा....साले...
मोहन लाल - हुज़ूर करा लुंगा..
आतंकी- झूठे..मरदूद-हिन्दू काफिर ..ठाये...ठाये !
साभार
अभि निगोतिया भाई जी की वाल से
#सेक्युलर_स्पेशल