मंगलवार, 26 मार्च 2019

कश्मीर की सौदेबाजी भाग 2

#कश्मीर_की_सौदेबाज़ी - 2
मई 2006 में सियाचिन की सौदेबाजी फैल होने के बाद एंटोनिया माईनो पर वेटिकन, अमेरिका का और माईनो का मनमोहन सिंह पर जबरदस्त दबाव था किसी भी तरह बिगड़ी बात को बनाने और कश्मीर विवाद को समाप्त करने का.......
#भगवा_आतंक_व_26नवंबर!!
यहां रास्ता निकाला सुशील सिंदे और गांधी परिवार के करीबी दिग्विजय सिंह ने..... सितंबर 2006 में मालेगांव की एक मस्जिद में धमाका हुआ फिर थोड़े थोड़े अंतराल पर हैदराबाद, अज़मेर, समझौता एक्सप्रेस में धमाके हुए..... प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ के ये पाकिस्तान पोषित IM की हरक़त थी पर फिर अचानक जांच ATS की एक ऐसी टीम को दी गयी जो शरद पवार और सिंदे के करीबी अधिकारियों की थी जिनपर इनकी मेहरबानियां पूर्व में रहीं थी...... और तैयार हुआ भगवा आतंक का भूत ATS टीम सीधे दिग्विजय को रिपोर्ट कर रही थी और उसे सीधा निर्देश था कुछ भी करो पर पकड़े गए लोगों से अपराध स्वीकार करवाओ.... पकड़े गए लोगों में सबसे अजीब नाम थे सेना के अधिकारियों के कर्नल पुरोहित व अन्य इन्ह इस दबाव के लिए रखा गया था के पुनः सेना JJ सिंह की तरह आपत्ति दर्ज न कर सके...... जन सामान्य का अपनी सेना से भरोसा टूटे...!
यहां इस साजिश की हवा निकाली साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित ने जिन्होंने भीषण अमानवीय अत्याचारों के बाद भी ATS के मनमुताबिक बयान नहीं दिया...... कांग्रेस जानती थी उसके फैसले का देश में विरोध भाजपा करेगी और भाजपा का आधार है आरएसएस अतः आरएसएस को आतंकी संगठन घोषित कर भाजपा को चुप रखना बेहद आसान काम होता...... पर साध्वी प्रज्ञा और कर्नल पुरोहित खेल बिगाड़ रहे थे....!
विकीलीक्स के एक केबल ने इस बीच एक नई सूचना दी कांग्रेस के सिंदे ने अमेरिका के राजदूत से अपनी वार्ता में आरएसएस द्वारा ATS अधिकारियों की हत्या की योजना की बात कही(26/11 से पहले)..... हालांकि तब ये बात राजदूत साहब के गले भी नहीं उतरी.... न कोई और समझ सका ये 2007 का अंत था उधर अमेरिका में चुनाव आगया और वहां के मुस्लिम वोटर को खुश करने को ओबामा ने कश्मीर के हल का वादा कर दिया.... सन् 2008 में राष्ट्रपति पद के चुनाव अभियान के दौरान बराक ओबामा ने टिप्पणी की थी कि यदि वे राष्ट्रपति चुन लिए जाते हैं तो ”कश्मीर संकट के समाधान के लिए पाकिस्तान और भारत के साथ मिलकर गंभीरता से कार्य करना” उनके प्रशासन के महत्वपूर्ण कार्यों में से होगा। ‘टाइम’ पत्रिका के जे केलिन से बातचीत में, ओबामा ने विस्तार से इसे यूं कहा:
“कश्मीर में इन दिनों जैसी दिलचस्प स्थिति है उसमें इस मसले को कब्र से निकालकर हल करने की एक बड़ी कूटनीतिक चुनौती है। इसके लिए एक विशेष दूत नियुक्त करना, आंकड़ेबाजी के बजाय सही मायने में प्रयास और खास तौर पर भारतीयों को यह समझाना और इसके लिए तैयार करना होगा कि आज जब आप एक आर्थिक महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर हैं तब इस मसले को हल कर इससे क्यों नहीं मुक्त हो जाते\ इसी तरह पाकिस्तानियों को यह समझाना होगा कि भारत आज कहां है और आप कहां हैं। आपके लिए कश्मीर मसले पर फंसे रहने से ज्यादा जरूरी है अफगान सीमा की बड़ी चुनौतियों से जूझना। मैं जानता हूं कि यह सब करना और इसमें कामयाब होना इतना आसान नहीं होगा, मगर मुझे उम्मीद है कि यह हो जाएगा।”
नवंबर में भारत पर हुआ सबसे भयावह आतंकी हमला 26/11 जिसमें भगवा आतंक पर काम कर रही पूरी टीम मारी गयी पर क़िस्मत से कसाब जिंदा पकड़ा गया और मीडिया ने ये खबर तुरंत दिखा भी दी..... विकीलीक्स के केबल और आतंकियों की हिन्दू भेष भूसा को अगर समझें..... और उसके तुरंत बाद के घटना क्रम को देखें जिसमें मुम्बई हमले को आरएसएस से जोड़ने का असफल प्रयास हुआ...... एक बात समझ आएगी अगर कसाब जिंदा न पकड़ा जाता और लश्कर थोड़ी गलतियां न करता तो मुम्बई हमले को भी भगवा आतंक के खाते में डाला जाता..... आरएसएस को प्रतिबंधित कर भाजपा को बैक फुट पर धकेला जाता...... और फिर LOC से सेना हटा कर कश्मीर के कई जिले और पूरा POK पाकिस्तान का हिस्सा मान कर आराम से समझौता होता...... न देश में कोई विरोध कर पाता न कांग्रेस सरकार को नुकसान होता.... इस बात की ताकीद इस हमले के बाद हुई भी सेना पूरी तरह कार्यवाही को तैयार थी पर सरकार ने साफ मना कर दिया हमले के 10 दिन बाद ही यूसुफ रज़ा गिलानी जो तब पाकिस्तान का PM था ने अपने भाषण में POK में कहा था "भारत सरकार हमसे वार्ता के अलावा कुछ नहीं कर सकती" और हुआ भी यही सिर्फ महीने भर बाद भारत ने अपनी तरफ से सचिव स्तर की वार्ता सुरुं की..... सवाल ये है के पाक PM के इस जबरदस्त भरोसे के पीछे क्या कारण था....... वो जनता था कश्मीर के सौदे ने भारत सरकार और कांग्रेस को मजबूर कर रखा है के वो झुकें.......!
कुछ सवालों के उत्तर मेरे पास भी नहीं पर सवाल तो हैं..... मुम्बई हमले की पूर्व जानकारी क्या भगवा आतंक की थ्योरी रचने वालों को थी??? क्या ATS टीम इतनी मूर्ख थी कि एक ही गाड़ी में सारे अधिकारी भर कर आतंकियों से आमने सामने जा भिड़े..... या उन्ह कुछ और निर्देश थे???
खैर मुम्बई हमले ने कहानी में कई तथ्य बिगाड़ दिए..... सबसे बड़ी गड़बड़ थी अमेरिकन नागरिकों की मौत और सीआईए एजेंट डेविड हेडली का नाम खुलना जिसके बाद ओबामा प्रशासन ने इस पूरे मामले से हाथ खींच लिए और कश्मीर में असैन्यकरण करके और कुछ और भाग पाकिस्तान को देकर विवाद खत्म करने का इरादा छोड़ दिया.......!
अमेरिका का इसमें सीधा फायदा कश्मीर के बदले अफगान युद्ध में पाकिस्तान की भूमिका थी पर कांग्रेस??
अंतिम सवाल सिर्फ एक बचता है आखिर एंटोनिया माईनो को इसके बदले क्या मिलता??
नोट :पोस्ट टाइम मैगज़ीन को दिए ओबामा के इंटरव्यू, द हिन्दू में छपे लेख और 2010 में आडवाणी जी द्वारा लिखे गए एक लेख पर आधारित!
लेखक : अजय सिंह