मंगलवार, 26 मार्च 2019

कश्मीर की सौदेबाजी भाग 1

#कश्मीर_की_सौदेबाज़ी - 1
वर्तमान में दो बातों से लगभग सभी भारतीय वाकिफ़ होंगे पहली भारत द्वारा पाकिस्तान पर हुई एयर स्ट्राइक, दूसरा भगवा आतंकवाद के आरोपियों का बरी हो जाना...... दरअसल ये दोनों विषय एक दूसरे से जुड़े हुए हैं बेहद गहराई से इतने के इनका जुड़ाव देखने को आपको बहुत गहरे उतरना होगा.... पर इस मुद्दे पर आने से पहले कुछ प्रश्नों पर विचार करिये और उनके उत्तर समझिए.....!
पहला कांग्रेस क्यों एयर स्ट्राइक के बाद इमरान के साथ खड़ी नज़र आई?? इसमें कोई राजनीतिक लाभ क्या संभव था?? अगर नहीं तो क्या कांग्रेस की मजबूरी थी??
दूसरा आखिर ये भगवा आतंक की कहानी गढ़ने की मंसा क्या थी? क्या ऐसा करने से कांग्रेस को कोई बड़ा लाभ होने वाला था अगर बात मुस्लिम वोट की थी तो वो तो वैसे भी भाजपा को नहीं मिलते फिर क्यों???
क्यों कि ये कहानी बड़ी है इसे दो हिस्सों में लिखना पड़ेगा...... ये कहानी है वेटिकन के इशारे पर कश्मीर के सौदे की जिसकी भूमिका तैयार करने को रचा गया था "भगवा आतंक" का शब्द, जिसके लिए हुआ था 26/11 का आतंकी हमला..... उदेश्य था गृहयुद्ध की असंका और भय तले बहुसंख्य हिंदुओं को शांत कर POK, दक्षिण उत्तर कश्मीर को पाकिस्तान को सौंप कश्मीर विवाद का अंत करना..... इसके पीछे थी बड़ी अमेरिकन लॉबी!!!!
#सियाचिन_का_सौदा!
सियाचिन के बारे में इतना तो सभी जानते हैं के दुनियां का सबसे ऊंचा रणक्षेत्र है और बेहद महत्त्वपूर्ण भी यही कारण है के यहां की सैन्य तैनाती पर आने वाले भारी भरकम खर्च और दुर्गम क्षेत्र के कारण होने वाली असंख्य दुर्घटनाओं के बाद भी भारत और पाकिस्तान दोनों इस इलाक़े को लेकर बेहद संवेदनशील हैं अगर सियाचिन पाकिस्तान के हाथ लग जाये तो बाकी की कश्मीर घाटी पर नियंत्रण बेहद आसान काम होगा..... और इस बात को समझने को आपको किसी एक्सपर्ट से मिलने की जरूरत नहीं आप अपने आसपास के किसी भी सैना के जवान जिसकी पोस्टिंग सियाचिन में रही हो से ये बात समझ सकते है  .... पर #रोमन_पतुरिया जिसका भगवान सिर्फ पैसा हो उसे इस सब से क्या लेना देना..... अगर #पूर्व_सेनाध्यक्ष_जे_जे_सिंह और NSA #एम_के_नारायणन ने न रोक होता तो इटालियन बार बाला एन्टोनिया माइनो, उसके मुनीम मनमोहन सिंह और वेटिकन के दलाल ए के एंटोनी ने 2006 में सियाचिन को पाकिस्तान को बेचने की पूरी तैयारी कर ली थी और अगर ये सफल हो जाते तो सायद आज पूरी कश्मीर घाटी पाकिस्तान के कब्जे में होती....!
कहानी UPA-1 में सुरुं हुई एन्टोनिया और उसका दामाद अमेरिका के एक नेता और सीनेटर #Lindsey_Graham से मिला Lindsey Graham अमेरिकन सीनेट में पाकिस्तान समर्थक के तौर पर पहचान रखता है इस सीनेटर ने इन्ह सियाचिन के सौदे का प्रस्ताव दिया जिसके तहत भारत और पाकिस्तान को इस क्षेत्र से अपनी सेनाएं हटानी थीं और इतना तो प्रत्येक भारतीय जनता ही है के सियाचिन से भारतीय सेनाओं के हटते ही पाकिस्तान बिना देरी किये समझौते को ताक पर रख कारगिल की तरह वहां कब्ज़ा जमा लेता....!
इस मुद्दे पर कई दौर की बातचीत पर्दे के पीछे चलती रही... न भारत की सेना को इस विषय पर कोई जानकारी दी गयी, न खुफिया एजेंसीयों को भरोसे में लिया गया और तो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार तक को इसकी भनक नहीं लगने दी गयी.... 27Mar2006 को सिओल में मनमोहन और पाकिस्तान का PM युशूफ़ रजा गिलानी इस समझौते के अंतिम प्रारूप पर सहमत हो गए जिसके तहत मनमोहल सियाचिन से शांति संदेश के नाम पर पहले सेनाएं वापस बुला लेने पर भी सहमत हो गया.....ये सारा खेल बेहद गुपचुप चलता रहा 2 मई 2006 तक जब एक मीटिंग बुला रक्षा सचिव को इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के निर्देश दिए गए और बात एम के नारायणन की जानकारी में आई जिसका उन्होंने तीखा विरोध किया पर असली काम किया सेनाध्यक्ष जे जे सिंह ने जिन्हों ने अपने पद पर रहते सियाचिन खाली करने से साफ मना कर दिया .... अब बात बाहर आचुकि थी और सारे मीडिया मैनजमेंट के बाद भी द हिन्दू नामक अखबार ने इसपर खबर छाप दी जिसके फलस्वरुप जे जे सिंह और एम के नारायणन को उनके पदों से हटा इस सौदे को कर पाना संभव नहीं रहा...! तत्कालीन #विदेश_सचिव_श्याम_सरन ने अपनी किताब में इस घटना क्रम पर काफी कुछ लिखा है साथ ही संजय बारु ने भी जिन्होंने UPA के कई घोटालों की पोल अपनी किताब में खोली...! खैर अपने अपने पदों की गोपनीयता की वजह से एम के नारायणन और जे जे सिंह उस समय इस मुद्दे पर शांत रह गए पर अपने पद से हटने के सालों बाद जब एक मीडिया चेनल ने जे जे सिंह का इंटरव्यू किया तो उन्होंने इस बात को खोल दिया हालांकि इंटरव्यू के वे अंश संपादित करवा दिए गए पर बात बाहर तो आही गयी....!
एक औरत जो इस देश की नहीं उसके द्वारा ये सब किया जाना कोई आश्चर्य का विषय नहीं पर मनमोहन सिंह ने तो तलवे चाटने की सारी सीमाएं ही तोड़ दीं अपना पद बनाये रखने और अपनी मालकिन को खुश करने के लिए देश बेचने तक मैं इसे शर्म महसूस नहीं हुई..... उससे भी ज्यादा बेशर्म और बेगैरत हैं वो कांग्रेसी और उनके समर्थक जो अब तक इस नचनियां और इसके मंदबुद्धि पुत्र की गुलामी कर इनके तलवे चाट रहे है.....!
जारी है.........
लेखक : अजय सिंह