रविवार, 31 मार्च 2019

जो बदला नही वो पहले सिमटा फिर मिट गया

"परिवर्तन"
[ चेंज योरसेल्फ! अदरवाइज वी विल "रिप्लेस" आॅर "इरेज़" यू ]
###
Indicom
Vodafone
USB
United Airlines
Freddie Mac  (क्रेडिट सर्विसेज) General Motors
Royal Bank of Scotland
Hindustan Motors (अंबेसडर वाले)
Quest communication
JDS Uniphase (आर्टिकल ब्रॉडबैंड)
ये उन कंपनियों के नाम है जिनकी आज से पांच दस वर्ष पहले भारत ही नहीं बल्कि एशिया और अमेरिका के उन तमाम देशों में "तूती" बोलती थी ।
इनके कर्मचारी बड़े रुआब से चलते थे!
यह अपने क्षेत्र की अग्रणी कंपनियां हुआ करती थी "हिंदुस्तान मोटर्स" के बारे में आप जानते हैं, स्वेत रंग के अंबेसडर कार की छ सात महीने वेटिंग हुआ करती थी।
क्लास था मर्सिडीज का नेहरू से लेकर अबू सलेम तक बड़े शौक से चलते थे इस मशीन से।
लोग गोरखपुर से रायसीना तक जाते थे इसे खरीदने....
लेकिन "हिंदुस्तान मोटर्स" ने समय के साथ अपने आप में परिवर्तन नहीं किया इनकी जो Policies थीं कभी नही बदलीं।
इनका Mission VISION Aim भी नहीं बदला कभी इनकी प्लानिंग स्टाफिंग डायरेक्टिंग कंट्रोलिंग रिपोर्टिंग बजटिंग उसी पुराने "wood car" तरह चलती रही......
नतीजा आज आपके सामने है सब कुछ होते हुए एक बड़ा मार्केट होते हुए भी आज ये लगभग समाप्त हो चुकी हैं अस्तित्व नहीं बचा इनका, विराट कोहली की पीढ़ी के लौंडे इनका नाम भी नहीं जानते इसीलिए कहते हैं समय के साथ "बदलना" बड़ा आवश्यक होता है !
अब आते हैं मुद्दे पर !!
ठीक इसी धर्रे पर पिछले सत्तर सालों से काम करती आई है "नेहरू एंड संस प्राइवेट लिमिटेड" इन्हें लगता है जो हम बोले वही न्याय है जो हम करें वहीं विकास है.....
हाय मेरे पापा को मार दिया...
हाय मेरे दादी को मार दिया..
मैने आपना पटी खोया है भारट के भिकास में....
हम कंपूटर लाए.....
हम बिजुली लाए....
मुझे वोट दीजिए मेरी नाक मेरी दादी से मिलती है .....
कांग्रेस ने इस कहावत को गलत साबित कर दिया जिसमें कहते हैं
"काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती"
लेकिन कांग्रेस ने एक ही काठ की हांडी साठ पैसठ साल तक चढ़ाई रखिए "गरीबी हटाओ" गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ गरीबी हटाओ !!!!
####
शर्म नहीं आती उत्तर प्रदेश के दो चार परसेंट बचे हुए लोगों को जो कांग्रेस का समर्थन करते हैं!
अरे "चौबीस" करोड़ आबादी वाले राज्य से तुम्हें कांग्रेस के "रिमेकिंग" के लिए एक नेता नहीं मिला कि तुमने एक अर्ध 'विक्षिप्तेण' "मद्यरूपेण" "दादीरूपेण" महिला को ला के ठोक दिया जिस की रैली में 40 लोगों की भीड़ भी नहीं जुटती। जिसको उत्तर प्रदेश के आठ जिलों का नाम नही मालूम।
मुझे बिल्कुल आश्चर्य नहीं होगा अगर कांग्रेस इस चुनाव में दस सीटों के अंदर सिमट जाती है, लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि आतंकवाद का धर्म नही होता दो पल के लिए मान लेते हैं, पर चुतीयों का कोई धर्म नहीं होता ये हर गांव नगर शहर मे बराबर मात्रा में पाए जाते हैं ।
यह वही लोग हैं जिन्हें कन्हैया कुमार में "भगत सिंह" और रवीश कुमार में पत्रकार नजर आता है।
यह बात तो है क्योंकि "मिष्ठान" से नाराज होने वाले अक्सर "विष्ठान" खाया करते हैं.......
एक और कायदे से समझने वाली बात है इस लोकसभा का चुनाव कांग्रेस 2029 को मद्देनजर रखते हुए लड़ रही है ।
अगर इस चुनाव में कांग्रेस की सीटें 50 से अधिक आ गई तो 10 साल बाद फिर कांग्रेस वापस कर लेगी क्योंकि चु#यों की संख्या में इजाफा भी तो होगा.....
बाकी मोदी "बदलाव" का दूसरा नाम है ।
   इति श्री नमस्कारेण !!!
  सूरज उपाध्याय
✍✍✍✍✍✍