शनिवार, 23 मार्च 2019

आडवाणी का टिकट कटना और वामिओ कांग्रेसियो का रोना

कुछ लोगों को लगता है कि आडवाणी जी के साथ नाइंसाफ़ी हुयी। इसमें अधिकांश वही लोग हैं जो गर आडवाणी जी प्रधानमंत्री बन गए होते 2004 या 2009 में, तो बुक्का फाड़ कर चिल्लाते।
किसी 30 वर्षीया बुजुर्ग मोहतरमा को आडवाणी जी की क़िस्मत ख़राब लगी अब आडवाणी जी के 91 वर्ष की जवानी में, तो उस पर टिप्पणी करते हुए एक शांतिदूत का वक्तव्य था कि 1992 में जो पाप किया, उसका फल तो मिलना ही था।..
..उस हिसाब से तो फिर मोदी जी पीएम बने मतलब मोदी जी ने निश्चित रूप से पुण्य किया होगा। फिर तो जो लोग मरते वक्त साल-दो साल बिस्तर पर ही सब करते-फिरते मरे, उन्होंने कितना पाप किया होगा ?
अभी हालिया समझौता ब्लास्ट कांड में स्वामी असीमानन्द समेत चार लोग न्यायालय से बरी हुए तो राजदीप सरदेसाई का कानून से भरोसा उठ गया, पर यही न्यायालय जब शांतिदूतों को छोड़ते हैं सबूतों के अभाव में, तब राजदीप सरदेसाई लिखते हैं कि कौन लौटाएगा उन बेगुनाहों के जेल में बिताए इतने वर्ष !
इसे ही sickulars की दोगलापंथी कहते हैं।
सपाई रामगोपाल यादव जी कहते हैं कि चुनावों में फ़ायदा लेने के लिए मोदी सरकार ने पुलवामा अटैक कराया। गोया मोदी जी ने पाकिस्तान की सरकार, उसकी सेना, उसकी ख़ुफ़िया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद को कहा कि हमला करो और इस प्रकार हम दोबारा जीत कर आएंगे।
एक जेम्स बॉन्ड के औलाद टाइप ने आरोप लगाया कि आखिर इतना आरडीएक्स आया कहाँ से पुलवामा में ? माने आरडीएक्स मोदी सरकार ने उपलब्ध कराया। इस थ्योरी पर चले गर तो नक्सलियों (और लिट्टे जैसे संगठनों को भी) को आज तक भारत में कौन हथियार और एक्सप्लोसिव उपलब्ध कराता रहा ? आज़ादी से अबतक 60 साल तो काँग्रेस ही रही है सत्ता में !
ख़ैर, अब तो आरोप-प्रत्यारोप के दौर ख़ूब चलेंगे। कई लोग वर्तमान सरकार की कमियां-खामियां गिनाएंगे तो कई लोग उपलब्धियां। अब देखना रोचक होगा कि 23 मई को बुरखा फाड़ के रोता कौन है और कौन अपनी टीवी स्क्रीन काली करता है !
- कुमार प्रियांक की फेसबुक वाल से साभार 