सोमवार, 1 अप्रैल 2019

23 मार्च एक भूल दिया गया दिन

#23_मार्च_2003_एक_भुला_दी_गई_तिथि
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23 मार्च 2003 ... इसके 12 वर्ष पहले ही कश्मीर घाटी से हिन्दू जा चुके थे  ... जनवरी 1990 के उस काली रात की वो कहानी पूरे देश का बच्चा बच्चा जनता है ....
उसके आगे 2003 का देखते हैं  ... पुलवामा जिले के शोपियां के निकट नाड़ीमर्ग गाँव में 52 हिन्दू अभी भी रह रहे थे ...
23 मार्च 2003 को लश्कर - ए - तैयबा के आतंकी आये और उस समय उपलब्ध 24 लोगों को लाइन में खड़ा करके गोली मार दी गई...
मरने वालों में 2 वर्ष के बच्चे से लेकर 65 वर्ष के बुजुर्ग थे ... गोली मारने के बाद उनके मृत शरीर को क्षत विक्षत किया गया था ... इस हत्या का मकसद था बचे खुचे हिन्दुओं को मार के पूरा ISलामिC इलाका बना देना ... 
इस काण्ड के होते समय उनके सारे गैर मजहबी शांतिप्रिय भाई चुपचाप दरवाज़ा बंद करके बैठे रहे  .. कोई नहीं आया बचाने ...
उस समय मुख्यमंत्री था मुफ़्ती मोहम्मद सईद ... किसी तरह की कोई सुरक्षा हिन्दुओं को नहीं दी गई .... इस हत्याकांड के लिए पाकिस्तान के रावलकोट स्थित जान मुस्तफा उर्फ़ अब्दुल्लाह जो कि लश्कर का आतंकी था उसको मास्टरमाइंड नामजद किया गया था जो कि आज तक नहीं पकड़ा गया  ..
हत्याकांड को अंजाम देने वाले आतंकी मुम्बई चले गए थे  ख़ुफ़िया रिपोर्ट पाने के बाद मुंबई पुलिस ने 2 को मार गिराया था  ...
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ये काण्ड को मैं याद क्यों कर रहा हूँ  ... ??
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ये है ताकत उस ISलामिC ग्रुप का जिसके पीछे कम्युनिष्ट गैंग दीवार बनके खड़ा है  .. इस हत्याकांड का लिंक खोजो तो बड़े बड़े पोर्टल पर नहीं मिलेगा  ... गूगल के पहले पेज पर कुछ छोटे छोटे खबर दिखेंगे  ...
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अब आप गूगल पे देख लो "हाशिमपुरा काण्ड" ... लेख आर्टिकल के भरमार मिलेंगे  ... सारे बड़े नामी खबरिया पोर्टल पर मलेगा  ..
यहाँ तक कि Firstpost जो कि इस काण्ड के वर्षों बाद पैदा हुआ वो भी हाशिमपुरा का follow up आर्टिकल निकाले बैठा है ... किसी को लेकिन नाड़ीमर्ग की नहीं पड़ी ...  हाशिमपुरा काण्ड के समय UP में कांग्रेस के वीर बहादुर सिंह की सरकार थी ... केंद्र में राजीव गाँधी PM थे  ...
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हाशिमपुरा काण्ड करके भी कांग्रेस सेक्युलर बनी रही  ... नाड़ीमर्ग में हिन्दू मारे जाने के बाद भी कम्युनल  ...
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ये है ताकत ISलामिC - कम्युनिस्ट गठजोड़ की  ...  और देख लो कमजोरी हिन्दू की जो मारे जाने के बाद किसी को इसका खबर तक नहीं  ...
आश्चर्य की बात है कि कल से आज दोपहर तक कुछ कश्मीरी हिन्दुओं से भी बात किया लेकिन उनको भी इस पर कोई असर नहीं, भूले बैठे हैं ...याद दिलाने पे भी बड़ी मुश्किल से याद आया उनको ...
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मजहब विशेष को हिन्दू की बात करने वाली सरकार से मतलब नहीं, सबका साथ सबका विकास गया उनके ठेंगे पर ... मीरवाइज़ उम्र फारूख साफ़ बोला कि विकास हमें नहीं चाहिए  .. भले ही हमारे सडकों को सोने से बना दो हमें नहीं चाहिए - हमें चाहिए क्या निज़ामे मुस्तफा ...
तो इनके लिए भले ही कोई राजीव गाँधी या वीर बहादुर जैसा आए और लाइन में खड़ा करके मार दे परन्तु उनको मोदी नहीं चाहिए क्योंकि उनको 1987 का हाशिमपुरा और गुजरात 2002 याद है ....
लेकिन हिन्दू 4 जनवरी 1990, 23 मार्च 2003 जैसे तारिख भुलाए बैठा है  ...
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22 मार्च 2019 को ही पाकिस्तान के सिंध से एक वीडियो आया है जिसमे एक बाप खुद को गोली मार दिए जाने को कह रहा है क्योंकि उसकी 2 बच्चियों का अपहरण करके उनको धर्म से मज़हब में बदल दिया गया  ..
एक बहन ने बलात्कार की बात भी कही है  ... इस पर क्या किसी भारतीय मीडिया हाउस ने कुछ कहा है ?? किसी कम्युनिष्ट ने ?? ...
इमरान खान से सीख लेने को कहने वाले और इमरान को नोबल पुरस्कार दिलाने की मुहीम चलाने वालों के मुँह पर पक्के धागे से सिलाई की जा चुकी है  ...
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आप तारिख भूलते रहो  ... वो तुमको तारिख से मिटाने को तैयार बैठे हैं  ...
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- रंजय त्रिपाठी जी

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