शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

शेर को सवाशेर चौकीदार

सेर को सवा-सेर चौकीदार Part-2 (सत्य घटना) : कल पार्ट-1 पढ़ने के बाद कई लोगों के मन मे संशय था कि FIR हुई कि नही, भैया कल की पोस्ट का सार था कि पुलिस प्रशासन का मुँह मत ताको, अपने पुरुषार्थ को जगाओ, खुद से अपनी मदद करो, उठो और लड़ो अपने हक के लिए, किसी के आगे भीख का कटोरा ले कर मत खड़े हो कि हमे न्याय दे दो, न्याय न मिले तो न्याय छीन कर लो, हम छीन कर लेंगे आज़ादी, क्या समझे, कब तक अंगूठा चूसते रहेंगे? कब तक बैसाखियों पर चलते रहेंगे? उंगली पकड़ कर चलना छोड़ दीजिए अब आपकी उम्र 70 वर्ष हो चुकी है ।
FIR करवाने का कोई मूड न था बस लड़को को सबक सिखाना था, पुलिस ने लड़को के घर दबिश दी, लड़के गायब कर दिए गए, हमने भी ज़्यादा दिमाग नही लगाया, फिर शुरू हुआ नेतागिरी का दौर, सिफारिशों के दौर, मैंने किसी की नही सुनी, क्योकि मैं उस इलाके में किसी नेता को पैदा ही नही होने देना चाहता था, क्योकि ऐसे नेता ही पहले इन बच्चों को छुड़वाते हैं फिर वे खुद इन से गलत काम करवाते हैं, इन्हें जेहादी बनवाते हैं, मैं यहाँ मौलाना मसूद अजहर या हाफ़िज़ सईद नही बनने दूँगा ये मैंने ठान लिया था, बड़े बड़े मुस्लिम नेताओं के फ़ोन आये मैंने सिरे से नकार दिया ।
इसके बाद एक फ़ोन आया अपने आपको खांग्रेस का अध्यक्ष बता रहे थे मौलाना साहब, मुझ से बोले "आप मुझे जानते नही है" मैंने जवाब दिया "मुझे आपको जानने की ज़रूरत ही नही है" दुनिया भर की बातें करने के बाद बोले "मैं सबको जनता हूँ, आपको फलाने फलाने से फ़ोन करवा दूँगा" बस ये वो समय था जब मेरा पारा चढ़ गया, एक तो नेता ऊपर से मुझे धौंस? इतनी हिम्मत? मैंने 2 टूक कहा "अरे आप सिंधिया से भी फ़ोन करवा देंगे ना तो मैं उनको भी बोल दूँगा बीच मे बोलने वाले आप कौन?, मैं किसी की नही सुनूँगा आज़मा कर देख लीजिए" साहब ने घबरा कर तुरंत गीयर बदला और बोले सर आपका छोटा भाई हूँ निवेदन कर रहा हूँ और फ़ोन काट दिया, मैंने तुरंत इंस्पेक्टर साहब को फ़ोन घुमाया और पूछा "क्या हुआ भाई? वो लड़के मिले की नही" कल तक मैं खुद कह रहा था बच्चे हैं भविष्य खराब हो जाएगा, आज अचानक मेरे बदले सुर भांप कर उन्होंने पुलिस की गाड़ी भेज लड़कों को 10 मिनट के अंदर लॉकअप में डाल दिया, और करो नेतागिरी, अच्छे भले छोड़ रहा था, गुस्सा थोड़ा शांत हुआ तो सोचा रात तक छुड़वा दूँगा ।
पर ये क्या कुछ ही समय बाद मुझे मेरे पड़ोसियों से फ़ोन आने शुरू हो गए "सर आपके घर के बाहर 10-12 मुश्तण्डे खड़े हैं, आपको पूछ रहे हैं" पता चला मौलाना साहब अपने गुंडों के साथ मेरे घर के बाहर खड़े हैं, लगता हैं उन्हें किसी ने मेरे बारे में बताया नही था, CCTV में पूरी फुटेज आ गयी, मौलाना साहब मुझ से फ़ोन पर good faith में बात कर रहे थे, अपने आपको मेरा छोटा भाई बता रहे थे, बाद में पता चला वे मेरा कॉल रिकॉर्ड कर रहे थे, मने छोटा भाई बन कर पीठ में छुरा घोंपा जा रहा था, अगर कोई मुझे से पूछे कि दुनियां में आपको सबसे ज़्यादा नफरत किस चीज़ से है तो मेरा जवाब होगा विश्वासघात, अब मेरे दिल से खून बह रहा था और दिमाग मे खून उबल रहा था, मैंने तुरंत FIR करने का निर्णय लिया और इंस्पेक्टर को कहा "FIR करनी है इनके खिलाफ" मेरी बात सुन कर वो अचंभित हुए पर पूरे विश्वास के साथ जवाब आया "जब आप चाहें सर", मेरे पास कई लोगों के फ़ोन आये किसी की एक न सुनी, कई BJP के नेताओं की भी सिफारिश आयी (वे सब आज के बाद टिकट भूल जाएं) उन्हें हराने के लिये अलग से बजट रख दिया है ।
मैंने तुरंत थाने जाने का निर्णय लिया, पर कल का दिन ही खराब था मेरे मित्र के साथ एक पंगा हो गया, उसे सुलझाने के चक्कर मे 3 घण्टे निकल गए, फिर थाने आया तो गुस्सा थोड़ा शांत हुआ, इंस्पेक्टर साहब बोले "सर साईकल छीनी थी इस पर लूट और डकैती का मुकदमा बनता है, आप कहें तो धारा लगा दूँ? 6 महीने तक ज़मानत नही होगी" फिर खुद ही पसीज कर बोले "ज़िन्दगी बर्बाद हो जाएगी इन सबकी" जो लड़के कल दादागिरी से बात कर रहे थे आज लॉकअप में बंद गिड़गिड़ा रहे थे, उनके घरवाले हाँथ पाँव जोड़ रहे थे, दुविधा ये थी कि अगर मैं इन लड़को को छुड़वा देता तो कई नेता इसका श्रेय लेने आ जाते, कई नेता उस इलाके में पैदा हो जाते, कई मसूद अजहर और हाफ़िज़ सईद के पैदा होने का खतरा था, सो FIR करवाना मजबूरी हो गयी थी, मैंने इंस्पेक्टर साहब से कहा कोई छोटी मोटी धारा लगा दीजिये इन्हें सबक भी मिल जाये और ज़िन्दगी भी खराब न हो, उन्होंने कहा "सर कम से कम चोरी की तो लगानी ही पड़ेगी" भारी मन से उन्होंने और मैंने FIR करवा दी ।
ये सब सिर्फ उस एक समझदार मौलाना जी तथाकथित खांग्रेस अध्यक्ष के चक्कर मे हुआ, ना वो मुझे धमकते, ना फ़ोन रिकॉर्ड करते, और न मेरे घर हमला करते, तो कुछ नही होता, थाने में तकरीबन 100 लोगों का हुजूम था, ये मूर्ख अब भी नही समझ पा रहे थे कि 100 क्या मुझे करोड़ से भी फर्क नही पड़ने वाला, संख्या बल मेरे लिए मायने ही नही रखता, हम 2 लोगों में भी बैठक कर लेते हैं और 5000 के सेमिनार को भी मना कर देते हैं अगर राष्ट्रहित में न हो तो, बेरहाल उन में से एक लड़के के घरवाले पहचान गए कि अगर सिफारिश लगवानी है तो कहाँ से लगवानी है, एक राष्ट्रभक्त मित्र आये उन्होंने कहा भाईसाहब फलां लड़के का कुछ हो सकता है क्या? मैंने बिना सवाल जवाब किये इंस्पेक्टर साहब को आवाज़ दी भैया फलां लड़के को बाहर कर दीजिए, लड़का बाहर, सब कुछ इतनी आसानी से देख सब भौचक्के रह गए, सब मेरे पास आये शुक्रिया अदा करने, मैंने कहा मुझे नही इन्हें शुक्रिया कीजिये इनकी वजग से आपका बच्चा छूटा है, लोग उन्हें शुक्रिया अदा करने लगे, मैंने उस इलाके में एक राष्ट्रभक्त को उनका पैरोकार बना कर खड़ा कर दिया, सबको समझ आ गया कि काम अगर कोई करवा सकता है तो राष्ट्रभक्त ही करवा सकते हैं, बाकी किसी के बस की बात नही, सिफारिश लगवानी है तो राष्ट्रभक्तों से लगवाईये आपके समाज मे भी कई राष्ट्रभक्त हैं, उनके संपर्क में रहिये, वे ही आपको मुश्किल स्थिति से बाहर निकाल सकते हैं, उनकी सब सुनते हैं मैं भी, क्योकि उनकी रेप्यूटेशन उनकी इज़्ज़त है ।
जो मुस्लिम मित्र मुझे मुसलमानों का दुश्मन करार देते हैं वो इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ें, इस दुश्मन ने कल एक मुसलमान बच्चे को रिहा करवा दिया, बाकियों पर जिन पर लूट और डकैती की धारा लगनी थी उसके बजाए सामन्य चोरी की धारा लगवाई, वो भी किसी मौलाना के कहने पर नही बल्कि एक राष्ट्रभक्त के कहने पर, ये मौलानाओं का चक्कर छोड़िये साहब ये बात बनाने की जगह बिगाड़ देते हैं, आदमी को जबरदस्ती FIR करने पर मजबूर कर देते हैं, राष्ट्रभक्त बनिये और राष्ट्रभक्तों से जुड़िये, नेशन फर्स्ट अपने दिल मे रखिये ये नितिन शुक्ला आपके लिए अपनी जान भी देगा, और अगर कोई मौलाना मसूद अज़हर, मौलाना हाफ़िज़ सईद या बिन लादेन बनने की कोशिश करेगा तो उसका अंजाम बहुत बुरा होगा, मैं इस देश में ऐसे किसी मौलाना को पनपने नही दूँगा, यहाँ Shiraz Quraishi भाई जैसे को सर माथे बैठाया जाएगा और ज़ाकिर नाईक जैसों को जूती की नोक पर रखा जाएगा, हर वो व्यक्ति जो देश की बात करेगा उसका इस्तकबाल होगा, ये देश हम सबका है, इसे सुरक्षित रखना हम सबका दायित्व है, अब आपको चुनना है कलाम बनना है या कसाब ।
और हां वो रिकॉर्डिंग वाले मौलाना जी पर आज घर मे घुस कर मेरे बीवी बच्चे को धमकाने, उन्हें जान से मारने की धमकी देने, उन पर हलमा करने, उन्हें अगवा करने के प्रयास करने और उन्हें जान से मारने का प्रयास करने का मुकदमा दायर करूँगा, पिक्चर अभी बाकी है दोस्त ।

साभार
श्री नितिन शुक्ला

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