सोमवार, 1 अप्रैल 2019

मैं भी इस यूग में था

*#मैं_भी_उस_युग_में_था l*
          *हमने अरबों के दस आक्रमण सिंध में रोके थे पर 711 ई. में इस्लाम की एक विजय ने सिंधु-सौवीर को हमेशा के लिये हमसे छीन लिया।*
        *काबुल में हमने इस्लाम के बारह आक्रमण विफल किये पर 870 ई. में एक पराजय से गजनी हमेशा के लिये छिन गई और आज दिल्ली में मेहरौली में खड़ा लोहे का गरुड़स्तंभ हिंदूकुश के विष्णुपद शिखर की उस ऊँचाई को, आर्यावर्त की उस प्राचीन वैज्ञानिक सीमा को याद कर आँसू बहाता है।*
          *1001 ई. में पेशावर के युद्ध के बाद पूरा अफ़ग़ानिस्तान और पश्चिमी पंजाब हमसे सदैव के लिये छिन गया।*
         *1192 ई. में तरायन की हार से लेकर 1707 ई. तक के पाँच सौ वर्ष के इस्लामी प्रभुत्व ने पूर्वी बंगाल को हमसे सदैव के लिये छीन लिया।*
           *1935 में ब्रिटिशों ने बर्मा हमसे अलग कर दिया।*
             *1947 ई. में घर के अंदर देशद्रोहियों / आस्तीन के सांपों ने षड्यंत्रपूर्वक  हमारी सिंधु नदी हमसे हमेशा के लिये छीन ली गयी।*
             *1962 ई. में पूर्वोत्तर और लद्दाख़ में चीनियों के हाथों हमारी हज़ारों किलोमीटर भूमि छिन गयी।*
          *2005 और 2009 में ‘इटालियन औरत’ के हाथों हमारी भूमि केरल, असम, बंगाल व कश्मीर में इस्लाम को बेच दी गयी, सेना बर्बाद कर दी गयी, संस्थाये तबाह कर दी गयीं।*
       *और अब 2019*
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       *2019 के चुनाव में प्रश्न राजनैतिक सत्ता का नहीं , बल्कि हमारे-हम सबके अस्तित्व का है। यह सही है कि हम सन 2014 में जंग जीते थे और उससे*

*और कुछ हुआ हो या ना हुआ हो*

           *लेकिन हमारे अस्तित्व के क्षरण की रफ़्तार पर रोक अवश्य लगी, हम कुछ जुझारू भी बने, इस्लामिक व ईसाई चरमपंथियों पर कुछ अंकुश भी लगा और आसुरी शक्तियों को प्रथम बार इस देश में भय का अनुभव हुआ जो एक शुभ संकेत है।*
*परंतु*
         *अभी भी अंधकार की यह काली शक्तियाँ बहुत शक्तिशाली भी हैं और बौखलाई हुई भी। इसीलिये वह एकजुट हो रहीं हैं और उनका साथ दे रहे हैं पाकिस्तान व चीन। नाम मात्र के हिंदू जो सैक्यूलर व प्रगतिशील कहे जाते हैं तथा रवीश कुमार व सिद्धू जैसे घर के भेदी जयचंद व मानसिंह तो सक्रिय हैं ही।*
        *कुछ ‘कालनेमि’ भी संतों, शंकराचार्यों का मुखौटा लगाकर मोदी के रूप में हिंदुत्व के सेनापति का विरोध करके पापी राक्षसों की मदद कर रहे हैं तो सोशल मीडिया पर कुछ ‘मारीच’ भी सक्रिय हैं।*
*जो भी व्यक्ति*
           *इस युद्धकाल में ब्राह्मण-ठाकुर-बनियां-दलित- जाट-गुर्जर-सवर्ण- चमार-युरेशियन-भीमटा जैसे शब्दों का अधिक प्रयोग कर हिंदू पक्ष में फूट डालें, समझ जाना ये मारीच और कालनेमि है।*
       *इस युद्ध को जो नादान हिंदू सिर्फ़ एक चुनाव के रूप में देख रहे हैं वे लोग उन्हीं हिंदुओं का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सिंध के युद्ध से लेकर तरायन के युद्ध तक हुये संघर्षों को   “दो राजाओं  के युद्ध”    के रूप में देखते थे। ये नादान शतुर्मुर्गी हिंदू सोमनाथ के  वही  पुजारी हैं जो कहा करते थे कि गजनी बहुत दूर है और गजनवी तो सोमनाथ तक आ ही नहीं सकता और आया तो सोमनाथ तृतीय नेत्र खोलकर उसे भस्म कर देंगे।*
          *याद रखना इतिहास में हम उनसे दस गुना ज़्यादा युद्ध जीते थे लेकिन उनकी एक जीत ने हर बार हमसे हमारे राष्ट्र का एक टुकड़ा अलग कर दिया और इस बार तो वे पूरे हिंदुत्व को निग़लने की तैयारी में हैं। हमारी सैकड़ों जीतों पर उनकी एक जीत भारी पड़ी है और अगर वे 2019 में जीते तो यह हिंदुत्व के लिये महाप्रलय सिद्ध होगी। केरल, कश्मीर, असम, बंगाल हाथ से गया हुआ ही समझो।*
*यह चुनाव नहीं युद्ध है!*
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         *यह युद्ध प्रकाश व अंधकार के बीच है!*
          *यह युद्ध राष्ट्रभक्तों और राष्ट्रद्रोहियों के बीच है !!*
           *यह युद्ध हिंदुत्व और हिंदुत्व के विनाश की आकांक्षा रखने वालों के बीच है !!!*
            *युद्धकाल में सेना और सेनापति पर शंका करना व प्रश्न उठाना सैन्य धर्म से द्रोह है और राष्ट्रधर्म से भी। इसलिये शंका विहीन मन से ‘युद्धाय कृतनिश्चय’ ही हमारा कर्मयोग है।*
          *भरत की संतानों !!! इतिहास के कोरे पृष्ठ तुम्हारा इंतज़ार कर रहे हैं। गर्व के साथ आने वाली पीढ़ियों को बताना—*
*कि*
*“हमारे अपने सुनहरे कल के लिये ‘नरेंद्र दामोदरदास मोदी’ के नेतृत्व में हमने अंधकार से युद्ध किया था। उस युद्ध में मैं भी उपस्थित था और मैं भी उस महासमर का एक योद्धा था।”*
सभार
रुद्र अनीश

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