शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

मायावती और गेस्ट हाउस कांड की घटना

यह फोटो देखिए इस फोटो में मायावती ने पुरुषों का कुर्ता पहना है आप चौंक गए ना असल में यह फोटो उसी स्टेट गेस्ट हाउस कांड का है जब मुलायम के गुंडों ने मायावती के पूरी तरह से कपड़े फाड़ दिए थे और मायावती के साथ न जाने क्या करने वाले थे तब संघ के स्वंयसेवक और यूपी बीजेपी के महामंत्री स्वर्गीय ब्रम्हदत्त द्विवेदी ने अपनी जान की परवाह किए बगैर मायावती को सकुशल बचाया था और उन्हें अपना कुर्ता पहनने को दिया और उन्हें कमरे से बाहर लेकर आये थे । इस केस में ब्रम्हदत्त द्विवेदी का सर फट गया था लेकिन उन्होंने मायावती की जान और इज्जत दोनों बचाई थी ।
लगता है मायावती 21 साल पहले की घटना भूल गयी है| तभी तो मायावती या उन के भाड़े के ये टट्टू समर्थको ने आज किसी की बहन, बेटी को पेश करने की बात की है, आज से 21 साल पहले 2 जून 1995 को उत्तर प्रदेश की राजनीति में जो हुआ वह शायद ही कहीं हुआ होगा। मायावती को उस वक्त को जिंदगी भर नहीं भूलना चाहिए। उस दिन को प्रदेश की राजनीति का ‘काला दिन’ कहें तो कुछ भी गलत नहीं होगा। उस दिन एक उन्मादी भीड़ सबक सिखाने के नाम पर दलित नेता की आबरू पर हमला करने पर आमादा थी। उस दिन को लेकर तमाम बातें होती रहती हैं लेकिन, यह आज भी एक कौतुहल का ही विषय है कि 2 जून 1995 को लखनऊ के राज्य अतिथि गृह में हुआ क्या था? मायावती के जीवन पर आधारित अजय बोस की किताब ‘बहनजी’ में गेस्टहाउस में उस दिन घटी घटना की जानकारी आपको तसल्ली से मिल सकती है
दरअसल, 1993 में हुए चुनाव में सपा और बसपा के बीच गठबंधन हुआ था। चुनाव में इस गठबंधन की जीत हुई और मुलायम सिंह यादव प्रदेश के मुखिया बने। लेकिन, आपसी मनमुटाव के चलते 2 जून, 1995 को बसपा ने सरकार से किनारा कस लिया और समर्थन वापसी की घोषणा कर दी। इस वजह से मुलायम सिंह की सरकार अल्पमत में आ गई। सरकार को बचाने के लिए जोड़-घटाव किए जाने लगे। ऐसे में अंत में जब बात नहीं बनी तो नाराज सपा के कार्यकर्ता और विधायक लखनऊ के मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस पहुंच गए|….
जहां मायावती कमरा नंबर-1 में ठहरी हुई थीं। बताया जाता है कि, 1995 का गेस्टहाउस काण्ड जब कुछ गुंडों ने बसपा सुप्रीमो को कमरे में बंद करके मारा और उनके कपड़े फाड़ दिए, और जाने वो क्या करने वाले थे कि तभी अपनी जान पर खेलकर उन गुंडों से अकेले भिड़ने वाले बीजेपी विधायक ब्रम्हदत्त द्विवेदी जो संघ के सेवक भी थे और उन्हें लाठी चलानी भी बखूबी आती थी इसलिए वो एक लाठी लेकर हथियारों से लैस गुंडों से भिड़ गये थे, अंत में पुलिस की मदत से गेस्टहाउस का दरवाजा तोड़कर मायावती को सकुशल बचा कर बाहर निकाल लाये थे। यूपी की राजनीती में इस काण्ड को गेस्टहाउस काण्ड कहा जाता है और ये भारत की राजनीती के माथे पर कलंक है खुद मायावती ने कई बार कहा है कि जब मैं मुसीबत में थी तब मेरी ही पार्टी के लोग उन गुंडों से डरकर भाग गये थे लेकिन ब्रम्हदत्त द्विवेदी भाई ने अपनी जान की परवाह किये बिना मेरी जान बचाई थी। कहा जाता है बाद में उन्ही गुंडों ने ब्रम्हदत्त द्विवेदी की गोली मारकर हत्या कर दी थी
साभार

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