शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

आवाहन

आवाहन
ये निष्पक्षता सबसे बड़ा पाखंड है । निष्पक्ष तो कोई होता नहीं । किसी न किसी विचार, धारा, व्यक्ति का पक्षधर होता है और जिस क्षण वह किसी का विरोध कर किसी अन्य का समर्थन करता है उसी क्षण उसकी निष्पक्षता नष्ट हो जाती है ।
लेखक, कवि और पत्रकार जो खुद को विशिष्ट समझते हैं , या कि उन्हें यह गुमान होता है कि वे धरती से पांच इंच ऊपर चलते हैं, दरअसल निजी जीवन में बेईमान और पाखंडी होते हैं । अच्छा मनुष्य और अच्छा लेखक इन दोनों का मेल होना दुर्लभ है ।
कवि लेखकों या पत्रकारों को अनिवार्यतः यह लगता है कि उन्हें मोदी सरकार का विरोध करना चाहिए । ऐसा करने से उनका अस्तित्व कायम रहेगा । तिस पर अगर वे केजरीवाल, ममता, लालू, मायावती और अखिलेश जैसों को बचाए रखने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हुए तो जीना व्यर्थ । वे मानते हैं कि मोदी का उमड़ना और भारत में एक और विजय की ओर बढ़ना खतरनाक है ।
मेरा मानना है कि मोदी की विजय न सिर्फ़ शुभ है बल्कि उस विजय में ही भारत की आत्मा का आनंद है। मोदी विजय धर्मयुग की स्थापना का महोल्लास है । यह भारत जो सदियों से दुख भोग रहा ।आक्रांताओं, सत्ता पिपासुओं, भ्रष्टों द्वारा लूटा गया । अब उसी भारत के सौभाग्य का दिन खुलने वाला है । मोदीविजय कोई साधारण घटना नहीं है । वह भारत में बहुकाल से प्रतीक्षित परिवर्तन का शंखनाद है । भारत के रक्तरंजित हृदय पर पीताभ वसंत का स्पर्श है । लेखक और पत्रकार हंसेंगे । मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता ।
मोदी इस देश की धर्मध्वजा के धारक हैं । मेरी दृष्टि यही देख पाती है । मैं विद्वान नहीं हूं । ना ही मुझे कवि लेखक होने का गुमान है । ना ही निष्पक्ष होने का नाटक मैं कर सकता हूं । मैं तो बस यही देख रहा कि वर्षों से ठगी, लूटपाट, छिनैती, धोखाधड़ी, निज उदरभरण और बांटो काटो की राजनीति से मुक्ति दिलाकर देश को विकास के रास्ते पर ले जाने वाला व्यक्ति सिर्फ़ मोदी है । मैं उस व्यक्ति में अपूर्व देशप्रेम, पुरुषार्थ, उत्कंठा और देशोद्धार की अग्नि देखता हूं । आइये ! हम साथ मिलकर मोदीविजय का पंथ प्रशस्त करें !
मां भारती सहाय हों ! जय श्रीराम!!

साभार
श्री देवांशु झा

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