शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

हम जागेंगे देश जागेगा

#तुम_जागो_देश_जगेगा
आखिर कितना भयानक है बंगलादेशियो के रहते भारत का भविष्य .. जानिए इसको इतिहास से .
राज्यसभा में मोदी सरकार के सामने तनकर खड़ा हो गया विपक्ष तथा नागरिकता संशोधन विधेयक को पास होने से रोक दिया था . . इस बिल के पास होने के बाद पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान से पीड़ित होकर भारत आने वाले गैर मुस्लिम(हिन्दू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी) हिंदुस्तान की नागरिकता प्राप्त कर सकेंगे तथा इस बिल के मुताबिक बांग्लादेशी घुसपैठिए को देश छोड़कर जाना होगा. लेकिन मजहबी कट्टरपंथी तथा तथाकथित सेक्यूलर दल इस बिल के खिलाफ हैं. ये जानने के बाद भी कि बांग्लादेशी घुसपैठिये देश की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं, देश को खोखला कर रहे हैं, विपक्ष राजनीति से नहीं आ रहा है.
कब-कब बने चुनौती
2012 में असम के कोकराझार में वहां के स्थानीय बोडो आदिवासी और बांग्लादेशी मुस्लिम घुसपैठियों के बीच जबरदस्त सांप्रदायिक झड़प के कारण 77 लोगों की मौत हो जाती है.
इस घटना के बाद से ही असम में घुसपैठियों के प्रति अविश्वास का माहौल तैयार होता है और इस मुद्दे का बहुत तेज़ी से राजनीतिकरण होता है.
इसी साल रोहिंग्या मुसलमानों और कोकराझार के दंगों में मरने वाले मुसलमानों को लेकर मुंबई के आज़ाद मैदान में बांग्लादेशी मुसलमानों के द्वारा एक रैली का आयोजन किया जाता है जिसमें बांग्लादेशी मुसलमानों की हिंसक भीड़ पुलिस कर्मचारियों को दौड़ा- दौड़ा कर मारती है.
महिला सिपाहियों के साथ बदसलूकी की जाती है और करोड़ों रुपये की सरकारी सम्पति को नुकसान पहुँचाया जाता है. इस बीच बंगाल और असम में कई बांग्लादेशी घुसपैठियों के तार प्रतिबंधित इस्लामिक संगठन 'हूजी' से जुड़े होने के मामले सामने आते हैं. इस्लामिक स्टेट ने भी भारत में अपने प्रभाव को बढ़ाने के लिए घुसपैठियों को अपने एजेंडे में शामिल होने का न्योता दिया था.
हिन्दुस्तान सरकार के बॉर्डर मैनेजमेंट टास्क फोर्स की वर्ष 2000 की रिपोर्ट के अनुसार 1.5 करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठ कर चुके हैं और लगभग तीन लाख प्रतिवर्ष घुसपैठ कर रहे हैं। हाल के अनुमान के मुताबिक देश में 4 करोड़ घुसपैठिये मौजूद हैं. पश्चिम बंगाल में वामपंथियों की सरकार ने वोटबैंक की राजनीति को साधने के लिए घुसपैठ की समस्या को विकराल रूप देने का काम किया.
तीन दशकों तक राज्य की राजनीति को चलाने वालों ने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक महत्वाकांक्षा के कारण देश और राज्य को बारूद की ढेर पर बैठने को मजबूर कर दिया. उसके बाद राज्य की सत्ता में वापसी करने वाली ममता बनर्जी बांग्लादेशी घुसपैठियों के दम पर जिहादी दीदी का तमगा लेकर मुस्लिम वोटबैंक की सबसे बड़ी धुरंधर बन गईं.
हाल के दिनों में बंगाल के कई इलाकों में हिन्दुओं के ऊपर होने वाले सांप्रदायिक हमलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों का ही हांथ रहा है. 2014 में पश्चिम बंगाल के सीरमपुर में नरेंद्र मोदी ने कहा था कि चुनाव के नतीजे आने के साथ ही बांग्लादेशी 'घुसपैठियों' को बोरिया-बिस्तर समेट लेना चाहिए. 2016 में असम में भाजपा की सरकार आने के बाद राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर को सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में अपडेट किया जा रहा है. लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार हिंदुत्व के मोर्चे पर किये गए अपने वादों का संज्ञान लेना चाहती है. बांग्लादेशी मुस्लिमों की एक बड़ी आबादी ने देश के कई राज्यों में जनसंख्या असंतुलन को बढ़ाने का काम किया है जिसके कारण देश में कई अप्रिय घटनाएं घटित हुई हैं. इसलिए इस समस्या का तुरंत निष्पादन जरूरी है.
साभार
श्री रुद्र अनीश

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