शुक्रवार, 5 अप्रैल 2019

मोदी क्यो कारण अनेक है

मुझे मोदी सरकार में सबसे अच्छी बात लगी कि यह सिस्टम को बदल रही है, वह पुराना superfecial चेंज वाला तरीक़ा नहीं है। एक उदाहरण लेते हैं हेल्थ care  सिस्टम।
देखते हैं स्टेप बाई स्टेप कैसे कार्य हुआ।
१) सबसे पहले तो लोगों को प्रेरित किया गया कि वह जेनरल फ़िटनेस रखें। स्वयं प्रधान मंत्री मोदी से लेकर सारे मंत्रियों ने फ़िटनेस पर ज़ोर दिया
२) फिर स्वच्छता पर ज़ोर दिया गया। ज़ाहिर सी बात है पचास प्रतिशत बीमारियाँ गंदगी से फैलती हैं। स्वच्छ भारत अभियान आदि सब इसी healthcare क्रांति का अंग हैं
३) भारतीय योग पद्धति से व्यायाम और योग / आयुर्वेद चिकित्सा को बढ़ावा दिया गया। भारतीय परिवेश में बीमारी को जड़ से समाप्त करने का सबसे कारगर तरीक़ा आयुर्वेद ही है। देश में सबसे उपेक्षित आयुर्वेद/ योग रहा अब तक।

इन तीन तरीक़ों से देश की सवा अरब जनसंख्या कहीं ना कहीं मोदी सरकार की हेल्थ care क्रांति के दायरे में आ गई।
४) अब जब बेसिक  होम्वर्क ठीक हो गया तो आगे बढ़ते हुवे कम्पनियों पर लगाम लगाई गई जो अनाप सनाप फ़ायदा कमा रही थीं। इसी कड़ी में लाखों के मिलने वाले स्टेंट आदि की क़ीमत हज़ारों में आ गई।
५) जनता को सस्ती क़ीमत पर दवाई मुहैय्या कराने हेतु प्रधान मंत्री जन औषधि केंद्र खोले गए। इन केंद्रों में जेनेरिक दवाइयाँ वाजिब दाम पर मिलती हैं। मैंने स्वयं ख़रीदी हैं, जितने में पहले पाँच दिन की दावा होती थी, यहाँ एक महीने की मिल जाती है।

इन दो क़दमों से मरीज़ों की औषधि के बिल में राहत आई। अब अगला क़दम देश की जनता को इलाज उपलब्ध कराना
६) आयुशमान भारत योजना ने देश का परिवेश ही बदल दिया। हर सामान्य व्यक्ति को साल में पाँच लाख तक का इलाज मुहैय्या कराना एक बड़ा अचीवमेंट रहा
७) आयुशमान भारत योजना ने देश के हज़ारों उद्यमियों को प्रेरित किया कि वह पैसा ख़र्च कर अस्पताल खोलें, ग़रीब मरीज़ का इलाज करें, सरकार पैसा देगी। उद्योग लगाने में लोगों को बसिक समस्या यही  होती है लोग कैसे  आएँगे। आयुशमान भारत पैनल में एनरोल हो जाने से अस्पतालों को एक तरह की गारंटी हो गई कि पेशेंट आ जाएँ पैसा सरकार से मिल जाएगा।
इन दो क़दमों से देश में हज़ारों छोटे छोटे अस्पताल शक्रिय हो गए। करोड़ों लोगों को ईलाज की सुविधा उपलब्ध हुई। (स्पष्ट कर दूँ आयुशमान भारत योजना में बड़े अस्पताल भी हैं)
अब जब लोग फ़िट रहने लगे, दवाई ठीक दाम पर मिलने लगी, ग़रीबों का इलाज होने लगा, प्राइवट अस्पताल खुल गए, अब आते हैं अगले क़दम पर।
८) पूरे देश में दसियों AIIMS बनने आरम्भ हुवे। युद्ध स्तर पर काम चलते हुवे बहुत सारे  बस दो तीन साल में मरीज़ों को इलाज मुहैय्या कराने लगे
९) भारत में भ्रस्ताचार का पर्याय बन चुकी मेडिकल काउन्सिल ओफ़ इंडिया को भंग कर दिया गया और कमान अपने हाथ में ले ली गयी।
१०) MCI ठीक कर सरकार अगले मिशन पर है, हर जिले में एक बड़ा अस्पताल और हर जिले में एक मेडिकल कोलेज बनाने के लिए। इसके अतिरिक्त देश भार में २०२२ तक पंद्रह लाख वेलनेस सेंटर खोले जाने का प्लान है।

इन दस क़दमों से दस वर्षों में भारत की जीर्ण शीर्ण हो चुकी चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से रेपेर कर दी गई।

बाक़ी फिर जो अंध विरोधी हैं, उन्हें यह नहीं समझाया जा सकता, हाँ भारत के हर सामान्य आम नागरिक तक अपनी स्कीम के लाभ पहुँचा पाना एक बिग डील है। मोदी सरकार को इस क्षेत्र में सौ/ सौ।
साभार
श्री नितिन त्रिपाठी

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